चित्तौड़गढ़ जिले की बिजयपुर रेंज में नीलगाय के बच्चे का शिकार करने के मामले में तीसरे आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। करीब एक महीने पहले वारदात को अंजाम दिया गया था। दो आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया था, जबकि तीसरे आरोपी की तलाश की जा रही थी। तीसरा आरोपी मारपीट के मामले में बेगूं जेल में बंद मिला। वन विभाग को जैसे ही आरोपी के बेगूं जेल में होने की सूचमा मिली तो तुरंत अदालत से प्रोडक्शन वारंट जारी करवाया गया और उसे जेल से लाकर चित्तौड़गढ़ कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने आरोपी इंद्रमल कंजर उर्फ इंद्रिया पुत्र बिटू निवासी धांगलिया खेड़ा को 13 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया। वन्यजीव शिकार में प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तारी वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक- उदयपुर संभाग में यह पहला मामला है जिसमें किसी वन्यजीव शिकार के आरोपी को प्रोडक्शन वारंट के जरिए गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया है। रेंजर विजयपुर भूपेन्द्र सिंह शक्तावत ने बताया- वन विभाग की जांच में सामने आया कि आरोपी इंद्रमल, गोपाल लाल भील और भंवरलाल बागरिया ने शिकार किया था। वे नीलगाय के बच्चे को जंगल से जिंदा पकड़कर लाए थे। इसके बाद उसे अपने घर में लाए। अगले दिन तीनों ने मिलकर उसे काट दिया। विभाग को मुखबिर से सूचना मिली तो टीम ने मौके पर पहुंची। वहां से करीब छह किलो कच्चा मांस बरामद हुआ। जांच में सामने आया कि आरोपी मांस काटकर खाने की तैयारी कर रहे थे। दो आरोपी पहले ही जेल भेजे जा चुके रेंजर विजयपुर भूपेन्द्र सिंह शक्तावत ने बताया- इस मामले में गोपाल लाल भील और भंवरलाल बागरिया को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया था। तीसरा आरोपी इंद्रमल घटना के बाद से फरार था, लेकिन बाद में बेगूं थाना पुलिस के मारपीट के एक मामले में गिरफ्तार होकर उपकारागृह बेगूं में बंद मिला। जानकारी मिली कि आरोपी 13 अक्टूबर तक जेल में निरुद्ध है और उसे जमानत मिल सकती है। ऐसे में विभाग ने सिविल न्यायालय एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट चित्तौड़गढ़ से बीएनएसएस की धाराओं के तहत प्रोडक्शन वारंट जारी करवाया। फिर 14 अक्टूबर को जेल से गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। वन विभाग की टीम ने निभाई अहम भूमिका पूरे मामले में तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। कार्रवाई उप वन संरक्षक वी. केतन कुमार और सहायक वन संरक्षक भावना शर्मा के निर्देशन में की गई। इस पूरे प्रकरण में रेंजर विजयपुर भूपेन्द्र सिंह शक्तावत की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्रवाई में नाका प्रभारी विजयपुर मनोहर सिंह जाट सहायक वनपाल, नाका प्रभारी उदपुरा राजेन्द्र सिंह रावत, वनपाल मेघनाथ, वनरक्षक योगेश कुमार गुजर, वनरक्षक मंदराज मीणा, वनरक्षक ओमप्रकाश बेनीवाल, वनरक्षक नारायण सिंह तंवर, वनरक्षक महेन्द्र सिंह चुण्डावत, वनरक्षक विजय सिंह चौहान सहित वन विभाग का पूरा स्टाफ शामिल रहा। वन विभाग का कहना है कि वन्यजीवों के शिकार से जुड़े मामलों में आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।