प्री-मानसून की अच्छी बारिश के बाद चित्तौड़गढ़ जिले में खरीफ सीजन ने रफ्तार पकड़ ली है। अब तक जिले में करीब 35 प्रतिशत रकबे में बुवाई हो चुकी है और आने वाले दिनों में मानसून सक्रिय होने के साथ बाकी खेतों में भी तेजी से बुवाई होने की उम्मीद है। इस बीच किसानों के बीच खाद की उपलब्धता को लेकर चल रही चिंता पर कृषि विभाग ने राहत दी है। विभाग का कहना है कि जिले में बीज और खाद की पर्याप्त व्यवस्था है और लगातार नई खेप भी पहुंच रही है। किसानों को घबराकर जरूरत से ज्यादा खाद खरीदकर घर में रखने की जरूरत नहीं है। जहां भी किसी क्षेत्र में खाद की कमी होगी, वहां प्राथमिकता के आधार पर तुरंत सप्लाई कराई जाएगी। विभाग ने किसानों से खेत में नमी देखकर ही बुवाई करने की भी अपील की है, ताकि बाद में दोबारा बुवाई जैसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। मूंगफली और मक्का सबसे आगे
मूंगफली की खेती बढ़ी शंकरलाल जाट ने बताया कि इस बार जिले में किसानों का रुझान मूंगफली की खेती की ओर ज्यादा बढ़ा है। इसकी सबसे बड़ी वजह मूंगफली के अच्छे बाजार भाव और बेहतर उत्पादन को माना जा रहा है। वहीं मक्का के दाम किसानों की उम्मीद के मुताबिक नहीं मिलने और दूसरी दिक्कतों के कारण कई किसानों ने इस बार मक्का का रकबा कम कर दिया है। कपास की खेती का क्षेत्र भी पिछले साल के मुकाबले बढ़ा है। उनका कहना है कि अगर बाजार में मूंगफली के अच्छे भाव आगे भी मिलते रहे तो आने वाले समय में इसका रकबा और बढ़ सकता है। डीएपी, यूरिया और दूसरे खाद का पर्याप्त स्टॉक शंकरलाल जाट ने बताया कि जिले में खरीफ सीजन के लिए 13 हजार 500 मीट्रिक टन डीएपी की जरूरत है। इसके मुकाबले अब तक 9 हजार 150 मीट्रिक टन डीएपी का आवंटन हो चुका है और 2 हजार 430 मीट्रिक टन स्टॉक अभी उपलब्ध है। जल्द ही 500 से 550 मीट्रिक टन डीएपी की नई खेप मिलने वाली है, जबकि चंबल की ओर से भी लगातार डीएपी पहुंच रहा है। डीएपी के विकल्प के रूप में जिले में 2 हजार 700 मीट्रिक टन एनपीके और 16 हजार 191 मीट्रिक टन एसएसपी उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि किसान जरूरत पड़ने पर तीन कट्टा एसएसपी और एक कट्टा यूरिया का उपयोग कर डीएपी का विकल्प अपना सकते हैं। वहीं जिले में यूरिया की कुल जरूरत 58 हजार 500 मीट्रिक टन है। अब तक 32 हजार 371 मीट्रिक टन यूरिया पहुंच चुका है और 14 हजार 584 मीट्रिक टन स्टॉक उपलब्ध है। उदयपुर रैक से 500 मीट्रिक टन यूरिया मिलने की संभावना है। इफको की एक और रैक भी प्रस्तावित है और चंबल से रोज दो से तीन ट्रक यूरिया जिले में पहुंच रहा है। जरूरत से ज्यादा खाद जमा न करें, नमी देखकर ही करें बुवाई शंकरलाल जाट ने किसानों से अपील की कि वे खाद का अनावश्यक भंडारण नहीं करें। कई जगह किसान पहले से ही जरूरत से ज्यादा खाद खरीदकर घर में रख रहे हैं, जबकि इसकी जरूरत नहीं है क्योंकि लगातार सप्लाई हो रही है। अगर किसी गांव या क्षेत्र में किसी खाद की कमी महसूस होती है तो किसान अपने कृषि पर्यवेक्षक या सहकारी समिति के माध्यम से जानकारी दें, वहां प्राथमिकता से खाद उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन खेतों में पर्याप्त नमी है, वहीं बुवाई करें। खासकर मक्का में नमी कम होने पर अंकुरण प्रभावित हो सकता है और दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है। वहीं मूंगफली में अंकुरण के बाद करीब 20 से 25 दिन तक ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती। जिन किसानों ने शुरुआती बारिश के बाद समय पर बुवाई कर दी थी, उन्हें खरपतवार नियंत्रण और फसल की शुरुआती बढ़वार में भी फायदा मिला है। कृषि विभाग का मानना है कि मानसून पूरी तरह सक्रिय होने के बाद जिले में खरीफ की बुवाई तेजी से पूरी हो जाएगी। इधर किसान सुरेश बैरवा ने बताया कि इस बार प्री मानसून में हमने बुवाई की है। सबसे ज्यादा जोर हमने मूंगफली को दिया है। मूंगफली को मक्के से ज्यादा दाम मिलते है इसलिए ज्यादा क्षेत्र में मूंगफली को बोया है। बाकी मक्का की भी बुवाई की है।