राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना शताब्दी वर्ष और विजयादशमी उत्सव के अवसर पर रविवार को चित्तौड़गढ़ में द्विवेणी पथ संचलन निकाला गया। दोपहर 3.30 बजे महाराणा प्रताप कॉलेज के खेल प्रांगण में मुख्य कार्यक्रम शुरू हुआ। इसके बाद शाम 5.30 बजे स्वयंसेवक दो अलग-अलग धाराओं में पथ संचलन पर निकले। दोनों धाराओं का शाम 6.11 बजे सुभाष चौक पर संगम हुआ। इसके बाद संयुक्त संचलन गोल प्याऊ और पावटा चौक से होते हुए शाम 6.16 बजे गोरा बादल क्षेत्र में समाप्त हुआ। पूरे रास्ते घोष दल की धुनों के बीच स्वयंसेवक अनुशासित कदमताल करते हुए आगे बढ़ते रहे। शहर के अलग-अलग इलाकों में बड़ी संख्या में लोग संचलन देखने पहुंचे। कई जगह रंगोलियां बनाई गईं और स्वयंसेवकों पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। छोटे बच्चों से लेकर वरिष्ठ स्वयंसेवकों तक की अनुशासित भागीदारी लोगों के आकर्षण का केंद्र रही। पूरे आयोजन के दौरान शहर में उत्साह का माहौल रहा। पहली धारा इन मार्गों से होकर सुभाष चौक पहुंची पथ संचलन की पहली धारा शाम 5.30 बजे महाराणा प्रताप कॉलेज से रवाना हुई। यह शाम 5.35 बजे सिंधु सर्कल, 5.42 बजे गुरु गोविंद सिंह सर्कल, 5.47 बजे कुंभानगर राजकीय विद्यालय, 5.49 बजे महाश्रमण सेतु मार्ग, 5.59 बजे कलेक्ट्रेट सर्कल, 6.02 बजे अजमीढ़ सर्कल, 6.07 बजे नामदेव सर्कल आजाद मठ और 6.10 बजे अप्सरा छवि गृह पहुंची। यहां से आगे बढ़ते हुए शाम 6.11 बजे सुभाष चौक पहुंची। इस मार्ग पर लोगों ने फूल बरसाकर स्वयंसेवकों का स्वागत किया। कई जगह रंगोलियां सजाई गईं। परिवारों के साथ लोग सड़क किनारे खड़े होकर संचलन का इंतजार करते नजर आए। घोष दल की धुनों और अनुशासित कदमताल ने लोगों का ध्यान खींचा। दूसरी धारा भी अलग मार्ग से पहुंची दूसरी धारा भी शाम 5.30 बजे महाराणा प्रताप कॉलेज से रवाना हुई। यह शाम 5.35 बजे स्टेशन मीरा चौकी, 5.42 बजे प्रताप सर्कल, 5.47 बजे परशुराम सर्कल, 5.49 बजे पर्ल हॉस्पिटल, 5.53 बजे महेश सर्कल, 6.01 बजे शिवाजी सर्कल, 6.07 बजे कुमावतों का नोहरा और 6.10 बजे चंद्रलोक छवि गृह पहुंची। इसके बाद शाम 6.11 बजे यह धारा भी सुभाष चौक पहुंची, जहां दोनों पथ संचलनों का संगम हुआ। संयुक्त संचलन गोरा बादल क्षेत्र में हुआ समाप्त सुभाष चौक पर संगम के बाद संयुक्त संचलन शाम 6.13 बजे गोल प्याऊ और 6.15 बजे पावटा चौक से होते हुए शाम 6.16 बजे गोरा बादल क्षेत्र में समाप्त हुआ। पूरे मार्ग में घोष दल की गूंज, अनुशासित कदमताल करते स्वयंसेवक और नन्हे स्वयंसेवकों की भागीदारी आकर्षण का केंद्र रही। जगह-जगह हुए स्वागत और पुष्पवर्षा से आयोजन का माहौल उत्साहपूर्ण नजर आया। संघ की ओर से आयोजित यह द्विवेणी पथ संचलन स्थापना शताब्दी वर्ष के प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल रहा। इसमें बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों और शहरवासियों ने भागीदारी निभाई।