एक व्यक्ति, आंखें भी वही और बीमारी भी वही... लेकिन तीन सरकारी मेडिकल बोर्ड की जांच में दृष्टि दिव्यांगता तीन अलग-अलग निकली। पहली जांच में 42% दिव्यांगता के आधार पर चित्तौड़गढ़ के विजेंद्र सिंह राणावत को राजस्थान स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक ने संदेह पर जांच कराई, जिसमें दिव्यांगता 30% रह गई। बैंक ने नौकरी से निकाला, वेतन की रिकवरी निकालते हुए धोखाधड़ी का केस भी कराया। पीड़ित हाईकोर्ट पहुंचा तो एम्स जोधपुर के मेडिकल बोर्ड ने दिव्यांगता 60% बताई। इसी रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी रद्द करते हुए नौकरी पर बहाल करने के आदेश दिए हैं। नौकरी वापस मिली, सभी सेवा भत्ते भी देने के निर्देश