विशेषज्ञों के अनुसार यदि समय रहते पारंपरिक शाखाओं की सीटें घटाकर AI जैसी नई शाखा शुरू की जाती, तो न केवल प्रवेश बढ़ते बल्कि कॉलेज की आय भी बढ़ती। अनुमान है कि 30 सीटों पर AI शुरू होने पर हर साल लाखों रुपए की अतिरिक्त फीस मिल सकती थी। सूत्रों के अनुसार नई शाखा शुरू करने के प्रयास हुए, लेकिन आंतरिक विरोध और सहमति नहीं बनने के कारण प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। विडंबना यह है कि जिन शाखाओं में लगातार सीटें खाली हैं, उनकी सीटें कम करने पर भी निर्णय नहीं लिया जा सका। आईटी और कंप्यूटर साइंस ही ऐसी शाखाएं हैं, जहां सीटें भर रही हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स में लगातार कम प्रवेश को देखते हुए 2021-22 में इसकी 60 सीटों में से 30 सीटें घटाकर कंप्यूटर साइंस में जोड़ी गईं। इसके बाद से कंप्यूटर साइंस की सभी सीटें भर रही हैं, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स में गिरावट बनी हुई है। वर्तमान समय का ट्रेंड और स्टूडेंट्स की डिमांड को समझते हुए कॉलेज को पारंपरिक इंजीनियरिंग शाखाओं से अपडेट करने की जरूरत है। क्योंकि वैश्विक स्तर पर शिक्षा तेजी से एआई एवं डेटा-आधारित हो रही है। एआई जैसे उभरते क्षेत्रों की अनुपस्थिति संस्थान की प्रतिस्पर्धात्मकता और छात्रों के आकर्षण को प्रभावित कर रही है। सैलेरी पैकेज स्टूडेंट्स को आकर्षित करता है और टेक्सटाइल विषयों में यह आकर्षण नहीं है। अतः भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एआई-संबंधित कार्यक्रमों का प्रारंभ या मौजूदा पाठ्यक्रमों में उनका समावेश किया जाना चाहिए। ^टेक्सटाइल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कोर विषयों में स्टूडेंट्स को हाई पैकेज नहीं मिलते हैं। यही कारण है कि स्टूडेंट्स पिछले कई वर्षों से कंप्यूटर और आईटी बेस्ड विषयों का चुनाव कर रहे हैं क्योंकि इनमें अच्छे पैकेज मिलते हैं। कॉलेज प्रबंधन ही तय कर सकता है कि नए विषय शुरू हों। - डॉ. डीके शर्मा, पूर्व प्राचार्य, एमएलवी टेक्सटाइल कॉलेज भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा टेक्सटाइल नगरी का प्रमुख एमएलवी टेक्सटाइल एवं इंजीनियरिंग कॉलेज बदलते समय के साथ खुद को अपडेट नहीं कर पा रहा है। नई तकनीकों के दौर में भी कॉलेज पारंपरिक ढर्रे पर चल रहा है, जिसका असर प्रवेश आंकड़ों में नजर आ रहा है। पिछले छह वर्षों में टेक्सटाइल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी शाखाओं में छात्रों की रुचि लगातार घटी है। इन विषयों में कई सालों से आधे से भी कम प्रवेश हो रहे हैं, जबकि कंप्यूटर साइंस और आईटी में ही छात्रों का रुझान बना हुआ है। देश-विदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई तकनीकों की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन कॉलेज में आज भी AI की एक भी शाखा शुरू नहीं हो पाई है। इसका सीधा असर यह है कि इस सत्र में कुल 340 सीटों में से करीब 32 प्रतिशत सीटें खाली रह गईं। टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी की स्थिति भी कमजोर बनी हुई है। 120 सीटों के मुकाबले इस वर्ष केवल 72 प्रवेश हुए, जबकि पिछले साल यह संख्या 52 थी। सुधार के बावजूद करीब 60 प्रतिशत सीटें खाली हैं। टेक्सटाइल कॉलेज होने के बावजूद दोनों टेक्सटाइल शाखाओं में लगातार छह साल से आधे से ज्यादा सीटें खाली रह रही हैं। प्रवेश आंकड़ों के अनुसार 2022-23 में कुल प्रवेश घटकर 148 तक पहुंच गया था, जो छह वर्षों का सबसे निचला स्तर था। हालांकि इसके बाद सुधार हुआ और 2025-26 में यह बढ़कर 233 तक पहुंचा, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में सीटें खाली हैं। भले ही यह प्रदेश का एकमात्र टेक्सटाइल कॉलेज है, लेकिन छह वर्षों में टेक्सटाइल की दोनों ब्रांचों में आधी से ज्यादा सीटें खाली ही रह रही हैं। आईटी, कंप्यूटर साइंस जैसी शाखाएं लगातार छात्रों की पहली पसंद बनी हुई हैं, वहीं मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्सटाइल जैसी पारंपरिक शाखाओं में लंबे समय से सीटें खाली रह रही हैं। इसके बावजूद कॉलेज प्रबंधन ने इन खाली सीटों का पुनर्संरचना कर नई ब्रांच शुरू करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया।