नगरपरिषद के नए बोर्ड को बने पूरा एक महीना बीत चुका है और शहर के 55 वार्डों के पार्षदों से लोगों को ढेरों उम्मीदें है कि अब शहर की सूरत बदलेगी। लेकिन बुनियादी समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई है। शहर के विकास की उम्मीद लेकर शहरवासियों ने 17 साल बाद भाजपा का बोर्ड बनाया। इसके साथ ही शहर की प्रमुख समस्याओं के बारे में भी आमजन द्वारा बोर्ड के सदस्यों को अवगत करवाया है। अगर शहर के मुख्य मुद्दों जैसे कि करोड़ों खर्च के बाद भी कचरे के ढेर, सड़कों पर घूमते आवारा पशु, बंद पड़ा एसटीपी प्लांट और टूटे सीवरेज के ढक्कन आदि समस्याओं को लेकर धरातल पर कुल काम का स्तर 40 प्रतिशत भी ठीक से नजर नहीं आ रहा है। शहर की जनता आज भी रोजमर्रा की इन मूलभूत सुविधाओं को तरस रही है। अब नए बोर्ड की ठोस कार्रवाई का इंतजार कर रही है। सफाई व्यवस्था और कचरा समस्या: महज 5 किलोमीटर के नगर परिषद क्षेत्र की सफाई के लिए एक निजी फर्म को सालाना 8.74 करोड़ रुपए दिए जा रहे हैं। नगर परिषद का खुद का अमला और संसाधन भी तैनात हैं, फिर भी शहर में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं। गेहूं रोड स्थित डंपिंग यार्ड सुचारू न होने से ग्रामीणों का जीना मुहाल है। समाधान: दिखावे के बजाय ठोस मॉनिटरिंग हो, कचरा निस्तारण का आधुनिक सिस्टम लागू किया जाए। बेसहारा पशुओं का आतंक समस्या: बेसहारा पशुओं की धरपकड़ की कोई पुख्ता व्यवस्था न होने से यह समस्या नासूर बन चुकी है। मुख्य सड़कों और गलियों में पशुओं के जमावड़े से वाहन चालकों और राहगीरों को भारी परेशानी हो रही है। समय-समय पर अभियान चलते हैं पर राहत नहीं मिलती। समाधान: पकड़े गए पशुओं को नंदी गौशाला में भेजा जाए और उनके दोबारा शहर में लौटने पर रोक लगाने की पुख्ता व्यवस्था हो। एसटीपी प्लांट पानी में डूबा समस्या: शहर से 5 किमी दूर कुड़ला गांव के पास बना सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पिछले एक साल से बंद पड़ा है। मशीनें पानी में डूबी हैं और वहां गंदगी का साम्राज्य है। रूडीप द्वारा समय पर कार्य पूरा न किए जाने के कारण शहर का गंदा पानी प्लांट तक पहुंच ही नहीं पाया है। समाधान: एसटीपी प्लांट को तुरंत पुनः चालू करवाया जाए तथा रूडीप को पाबंद कर प्लांट तक आने वाले पानी के नाले को सुचारू किया जाए। टूटे ढक्कन और चॉक नाले समस्या: भीतरी इलाकों में क्षतिग्रस्त सीवरेज के ढक्कन और चॉक नाले आमजन के लिए मुसीबत बने हैं। हर साल मानसून से पहले नालों की सफाई के लिए टेंडर और वर्कऑर्डर होते हैं, लेकिन समयानुसार काम न होने से परेशानी बढ़ती है। टूटे हुए ढक्कन आए दिन बड़े हादसों को न्योता दे रहे हैं। समाधान: टेंडर जारी होने के तुरंत बाद कार्य शुरू हो और तय समय-सीमा में निर्माण कार्य पूरा कराने की सख्त हिदायत दी जाए।