पुलिस भले ही प्रदेश में इस साल के 6 माह में अपराध घटने का दावा कर रही है, लेकिन चोरियों और बच्चों के खिलाफ यौन अपराध पर अब भी शिकंजा पूरी तरह नहीं कस पाई है। इस साल जनवरी से जून तक प्रदेश में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में 94 हजार 652 केस दर्ज हुए हैं, जबकि पिछले साल इन 6 माह में 99 हजार 272 मामले सामने आए थे। पिछले साल की तुलना में अपराध 4.65 फीसदी कम हुए। हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, डकैती, अपहरण, दुष्कर्म जैसे लगभग सभी संगीन अपराधों में गिरावट दर्ज हुई। चोरी और नाबालिग से दुष्कर्म ऐसे बड़े अपराध रहे, जिसका ग्राफ नीचे आने के बजाय बढ़ गया। पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के अनुसार इस साल चोरी के 16 हजार 350 मामले दर्ज हुए, जो पिछले साल के मुकाबले 16 हजार 336 मामलों से 14 ज्यादा हैं। यानी प्रदेश में हर दिन औसतन करीब 90 और हर 16 मिनट में एक चोरी हो रही हैं। इसी तरह इस जून तक प्रदेश में पॉक्सो एक्ट के 884 मामले दर्ज हुए, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 878 मामले सामने आए थे। यानी इस साल 6 मामले (0.68%) बढ़ गए। कुल दुष्कर्म के मामलों में भले ही कमी आई हो, लेकिन मासूम अब भी सुरक्षित नहीं हैं। ऐसे में बच्चों के खिलाफ यौन अपराध और चोरियां बढ़ना पुलिस के लिए चिंता का विषय है। 27,030 मामलों में एफआर लग चुकी व 32,920 में चालान पेश जनवरी से जून 2026 के दौरान प्रदेश में 94 हजार 652 आपराधिक मामले दर्ज हुए। इनमें से 27,030 मामलों में एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लग चुकी है। बचे हुए 67 हजार 622 मामलों में से 32,920 केस में पुलिस ने जांच पूरी कर कोर्ट में चालान पेश किए हैं। अब 34,702 केस पेंडिंग है। इनमें चोरी के 5,398, अपहरण के 188, नकबजनी के 1,210, हत्या के प्रयास के 553, दुष्कर्म के 527, हत्या के 340, लूट के 188, दंगा-फसाद के 82, डकैती के 19 और अन्य मामलों में 24 हजार 643 केस हैं। इस साल मई में सबसे ज्यादा, फरवरी में सबसे कम अपराध इस साल जनवरी से जून के दौरान प्रदेश में मई सबसे ज्यादा अपराध वाला महीना रहा और 16 हजार 982 केस दर्ज हुए। इसके बाद जून में 16 हजार 377 और मार्च में 16 हजार 016 केस सामने आए। दूसरी ओर फरवरी में सबसे कम 14 हजार 828 मामले दर्ज हुए। यानी साल के पहले छह महीनों में फरवरी तक अपराध का ग्राफ नीचे रहा। इसके बाद लगातार बढ़ते हुए मई में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया और जून में हल्की गिरावट दर्ज हुई। अन्य अपराध घटे, सबसे ज्यादा लूट के मामलों में आई कमी जनवरी से जून 2025 के मुकाबले 2026 में अधिकांश संगीन अपराधों में गिरावट दर्ज हुई है। सबसे ज्यादा कमी लूट के मामलों में 19.93% की आई। इसके बाद डकैती में 16.28%, दुष्कर्म में 13.36% और हत्या के प्रयास के मामलों में 11.17% की गिरावट रही। वहीं छेड़छाड़ के मामले 7.51%, अपहरण 4.72% और हत्या के मामले 4.41% कम हुए। हालांकि चोरी और पॉक्सो के मामलों ने पुलिस के लिए चुनौती खड़ी कर दी है। परिवार, स्कूल और समाज की भी जिम्मेदारी चोरी और बच्चों के खिलाफ यौन अपराध ऐसे अपराध हैं, जिनकी रोकथाम केवल पुलिस कार्रवाई से संभव नहीं होती। विशेषज्ञों के अनुसार इन अपराधों पर अंकुश के लिए परिवार, स्कूल, समाज और कानून-व्यवस्था सभी की संयुक्त भूमिका जरूरी है। बच्चों के मामलों में जागरूकता सबसे बड़ा हथियार मानी जाती है। उन्हें ‘गुड टच-बैड टच’, ऑनलाइन सुरक्षा और किसी भी संदिग्ध व्यवहार की तुरंत जानकारी भरोसेमंद व्यक्ति को देने की शिक्षा दी जानी चाहिए। वहीं चोरी की घटनाओं को रोकने में सीसीटीवी, बेहतर स्ट्रीट लाइट, मोहल्ला निगरानी समितियां और डिजिटल सुरक्षा उपकरण प्रभावी साबित होते हैं। पुलिस का बीट सिस्टम, त्वरित गश्त और अपराधियों का डेटा विश्लेषण भी रोकथाम में अहम भूमिका निभाता है।