टोंक जिले के अविकानगर मालपुरा केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (CSWRI) ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अधीन संचालित इस संस्थान के वस्त्र निर्माण एवं वस्त्र रसायन विभाग (TMTC) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सिको जोस को प्रतिष्ठित ग्लोबल साइंटिस्ट इंडेक्स की ओर से विश्व के टॉप वैज्ञानिकों की सूची में स्थान दिया है। ये सम्मान उन्हें टेक्सटाइल केमेस्ट्री, ऊन अनुसंधान में विशेष योगदान, उत्कृष्ट शोध कार्य, उच्च गुणवत्ता वाले अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रों और नवाचारों के लिए दिया गया है। दरअसल, संस्थान में मोटी ऊन से कई उपयोगी सामान तैयार होते हैं। जैसे बैग, माउस पैड और ऑफिस फाइल बैग। बेकार ऊन से बना रहे प्रोडक्ट डॉ. सिको जोस करीब एक दशक से टेक्सटाइल केमिस्ट्री (वस्त्र रसायन) और ऊन प्रसंस्करण के क्षेत्र में लगातार रिसर्च कर रहे हैं। उन्होंने भेड़ की ऊन के वैज्ञानिक उपयोग, उसके प्रसंस्करण, विविधीकरण और आधुनिक वस्त्र निर्माण तकनीकों पर कई महत्वपूर्ण शोध किए हैं। उनके नाम अनेक अंतरराष्ट्रीय रिसर्च पेपर प्रकाशित हैं, कई पेटेंट दर्ज हैं। वह ऐसी मोटी ऊन पर अनुसंधान कर रहे हैं, जिसे किसान अक्सर बेकार समझकर फेंक देते हैं। डॉ. जोस और उनकी टीम इस ऊन को वैज्ञानिक तकनीकों से साफ कर, उसकी बारीक प्रोसेसिंग कर उसे उपयोगी उत्पादों में बदलने का कार्य कर रही है। पशुपालकों के लिए आय के साधन बढ़ेंगे डॉ. सिको जोस ने बताया- संस्थान में मोटी ऊन से कई उपयोगी सामान तैयार किए जा रहे हैं। इनमें बैग, माउस पैड, ऑफिस फाइल बैग सहित अनेक दैनिक उपयोग की वस्तुएं शामिल हैं। इन उत्पादों में से कई को बाजार में भी उतारा जा चुका है और उन्हें अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। इसके लिए विभिन्न तकनीकों के माध्यम से ऊन की सफाई, फाइबर प्रोसेसिंग और नई उत्पाद निर्माण तकनीकों पर लगातार शोध किया जा रहा है, ताकि ऊन का मूल्य बढ़े और पशुपालकों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिल सके। गौरव का विषय संस्थान के निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर ने इस उपलब्धि पर कहा- डॉ. सिको जोस की यह सफलता पूरे संस्थान के लिए गौरव का विषय है। यह संस्थान वस्त्र निर्माण एवं वस्त्र रसायन विभाग पिछले कई वर्षों से ऊन अनुसंधान और आधुनिक टेक्सटाइल तकनीकों के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल चुकी है संस्थान के मीडिया प्रभारी डॉ. अमरसिंह मीना ने बताया- केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान का अंतरराष्ट्रीय पहचान पर उत्कृष्ट प्रदर्शन का लंबा इतिहास रहा है। इससे पहले भी संस्थान के निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर, डॉ. सिको जोस तथा कई अन्य वैज्ञानिकों को उनके उत्कृष्ट रिसर्च कार्यों के लिए विश्व की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक रैंकिंग्स में स्थान मिल चुका है। अविकानगर संस्थान केवल राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कृषि एवं ऊन अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर चुका है। किसानों को मिलेगा लाभ विशेषज्ञों का मानना है कि मोटी ऊन के उपयोग पर हो रहा यह रिसर्च भविष्य में पशुपालकों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण उद्योगों को भी नई दिशा देगा। यदि अब तक बेकार मानी जाने वाली ऊन से कच्चे उत्पाद बड़े पैमाने पर तैयार होते हैं, तो इससे ऊन उद्योग को नई गति मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। वीडियो: दीपांशु पाराशर, डिग्गी