राज्य सरकारों की जनकल्याणकारी योजनाओं और पोर्टल्स पर हैकर्स के बड़े साइबर हमले हो रहे हैं। हैकर्स आम लोगों और लाभार्थियों का डेटा डार्क-वेब पर बेच रहे हैं। इसका खुलासा तब हुआ जब भास्कर टीम ने 5 आईटी एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर 100 घंटे तक इन्वेस्टिगेशन की। इस पड़ताल में सामने आया कि भारत के नागरिकों का डेटा डार्क-वेब के जरिए रूस के साइबर बाजारों में खुलेआम बिक रहा है। सरकारी पोर्टल्स के लॉगिन आईडी और पासवर्ड की कीमत महज 10 डॉलर (लगभग 930 रुपए) रखी गई है। डार्क-वेब पर ‘बिग ब्रदर’ नाम के एक पेज पर देश के 17 महत्वपूर्ण सरकारी विभागों का डेटा बिक्री के लिए उपलब्ध है। इनमें छत्तीसगढ़, केरल, बिहार, महाराष्ट्र वन विभाग, कोल इंडिया और राष्ट्रीय आयुष मिशन जैसे संवेदनशील विभाग शामिल हैं। पड़ताल में यह भी सामने आया कि देश में जितने म्यूल अकाउंट और फर्जी पहचान के मामले आ रहे हैं, उनके लिए डेटा यहीं से खरीदा जा रहा है। जब टीम भास्कर ने डार्क-वेब और इससे जुड़े टेलीग्राम के ‘स्लम फ्री’ चैनल पर पड़ताल शुरू की, तो हैकर्स ने टीम के सिस्टम पर भी वायरस फाइलों के जरिए जवाबी हमला कर दिया। हैकर्स का मकसद सिस्टम में घुसकर फेसबुक प्रोफाइल और तस्वीरों सहित सभी निजी जानकारियां चुराना था। भास्कर एक्सपर्ट अभिषेक त्रिपाठी, साइबर एक्सपर्ट लापरवाही पर 1 करोड़ तक जुर्माना अपराधी डार्क-वेब से नागरिकों के सरकारी दस्तावेज और निजी डेटा खरीदकर फर्जी आईडी बनाते हैं। इसका उपयोग ‘म्यूल अकाउंट’ खोलने व वित्तीय धोखाधड़ी में किया जाता है। यदि हैकर्स के हाथ ‘सुपर यूजर’ या एडमिन अकाउंट लग जाता है, तो वे सीधे लाभार्थियों को मिलने वाली सरकारी सहायता को किसी अन्य फर्जी खाते में ट्रांसफर कर सकते हैं। नवंबर 2027 से देश में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट लागू होगा। तब सरकारी विभाग से लोगों का डेटा लीक होने पर संबंधित विभाग पर 1 करोड़ रुपए तक जुर्माना लग सकेगा। साइबर हमलों की स्थिति… जांच में सामने आया कि हैकर्स ने मुख्य रूप से ‘वाइडर’, ‘रंधामाइट्स’और ‘लूमा सी-2’ जैसे खतरनाक वायरस का इस्तेमाल करके डेटा चुराया है 1. राजस्थान (पोर्टल: sso.rajasthan.gov.in और janadhar.rajasthan.gov.in) 2. मध्य प्रदेश (राजस्व विभाग पोर्टल: saara.mp.gov.in) वाइडर वायरस से प्रभावित मिला 3. बिहार (पोर्टल: sspmis.bihar.gov.in और 7-निश्चय पोर्टल), ये एक्रीड वायरस प्रभावित