सलूंबर के डगार स्थित राजकीय आयुर्वेद औषधालय में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया। यह शिविर चिकित्सा, स्वास्थ्य और आयुर्वेद विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ‘टीबी मुक्त ग्राम पंचायत अभियान’ के तहत चल रहे 100 दिवसीय विशेष अभियान का हिस्सा रहा। शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया। इस दौरान स्वास्थ्य टीम ने ग्रामीणों की स्क्रीनिंग की। संभावित टीबी रोगियों के बलगम के नमूने लिए गए। साथ ही मौके पर ही उच्च रक्तचाप (बीपी) और मधुमेह (शुगर) की निःशुल्क जांच भी की गई। जिन मरीजों में गंभीर लक्षण पाए गए, उन्हें आगे की जांच के लिए एक्स-रे कराने की सलाह दी गई। आयुर्वेदिक डॉक्टर्स ने बताया इम्युनिटी बढ़ाने का महत्व आयुर्वेद विभाग के विशेषज्ञों ने शिविर में मौजूद लोगों को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के उपाय बताए। उन्होंने संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या और प्राकृतिक उपचार पद्धतियों के जरिए शरीर को मजबूत बनाने पर जोर दिया, ताकि टीबी जैसी बीमारियों से बचाव किया जा सके। जागरूकता सत्र में बताए टीबी के लक्षण और इलाज शिविर के दौरान एक विशेष जागरूकता सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें ग्रामीणों को टीबी के प्रमुख लक्षणों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि यदि दो हफ्ते से अधिक खांसी, वजन में कमी और रात में अधिक पसीना आना जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत जांच करानी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि टीबी लाइलाज नहीं है और समय पर पहचान तथा पूरा उपचार लेने से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। निक्षय पोषण योजना की जानकारी, पोषण पर दिया जोर चिकित्सा अधिकारियों ने ग्रामीणों को ‘निक्षय पोषण योजना’ के बारे में भी जानकारी दी। इस योजना के तहत टीबी मरीजों को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता दी जाती है, ताकि वे बेहतर पोषण प्राप्त कर सकें। विशेषज्ञों ने उपचार के साथ-साथ पौष्टिक आहार को भी जरूरी बताया।