दादा जी...छोटिया... और जोधपुरी भाषा...। ये वो वीडियो क्रिएटर और इन्फ्लुएंसर हैं, जिन्होंने 2018 में अपनी वीडियो क्रिएट की शुरुआत की थी। इनकी शुरुआत बैंक में नौकरी के दौरान हुई थी, जब वे पुलिस वाले की एक्टिंग कर ग्राहकों से बात करते थे। 2018 में पहला वीडियो बनाया, जिसे लोगों ने काफी पसंद किया। ये कहानी है जोधपुर के प्रतीक मुथा की। खास बात ये है कि इनकी वीडियो क्रिएटर की जर्नी में इनकी मां और पत्नी ने भी काफी साथ दिया। इधर, दैनिक भास्कर ऐप की ओर से शुरू किए गए भास्कर समाधान की तारीफ करते हुए बोले- अब लोगों की शिकायतें भी सुनी जाएंगी और उन पर काम भी होगा। इसे लेकर उन्होंने अपनी मां और पत्नी के साथ मिलकर एक वीडियो भी शेयर किया है और लिखा- इसे जोधपुर की हर जनता तक पहुंचाएं। पहले पढ़ें प्रतीक मुथा की कहानी... बैंक में जॉब के दौरान एक्टिंग करते थे, इसी वजह से बैंकवालों का लाड़ला था प्रतीक मुथा ने बताया- मैं बैंक में रिकवरी की पोस्ट पर था। जिन लोगों के रुपए पेंडिंग चलते थे, उन्हें कॉल करना पड़ता था। सबसे बड़ा चैलेंज था कि ये कॉल एक्टिंग के तौर पर होते थे। कभी बैंक मैनेजर तो कभी पुलिस वाले की एक्टिंग कर मैं बात करता था। मैं उनसे कहता था, आपको बैंक में पैसा जमा करवाना है। इसी काम की वजह से मैं बैंकवालों का लाड़ला हो गया और मुझे सैलरी से ज्यादा इंसेटिव मिलने लगा। तब मुझे लगा कि क्यों न इसी से एक शुरुआत की जाए। पहली बार 2018 में पहला वीडियो बनाया, जिसे लोगों ने काफी पसंद किया। दादा-नाना का प्यार नहीं देखा इसलिए दादाजी का करेक्टर चुना प्रतीक का एक फेमस करेक्टर है, दादा जी...। इस करेक्टर को लेकर प्रतीक ने बताया कि साल 2007 में दादा छोड़कर चले गए। नाना भी जल्दी चले गए थे तो उनका प्यान नहीं देखा। मैं जब भी बाहर जाता तो बुजुर्गों को देखता, उनकी बातें सुनता। वे हमेशा सामाजिक सरोकार की बातें करते थे। इसी से आइडिया आया कि क्यों न इसी करेक्टर को वीडियो में ​बताया जाए। दूसरा मारवाड़ी भाषा को इसलिए चुना क्योंकि ये अपने लोगों तक पहुंचने का सबसे आसान तरीका है। अपने लोगों को यदि बात पहुंचानी है तो वह मारवाड़ी है, इसलिए सारे वीडियो मारवाड़ी में बनाता हूं। खास बात ये है कि उनकी मां और पत्नी भी उनके इस क्रिएटिव काम में हमेशा आगे रहती हैं। प्रतीक ने बताया- मदर्स डे पर मां पर एक वीडियो बनाना था। तो मां को कहा कि भाड़े की मां क्यों लेकर आऊं। तब मां को पहली बार अपने साथ वीडियो में लिया। इसके बाद उनकी फ्रेंड्स ने कॉल किया और ये वीडियो भी खूब वायरल हुआ। मेरा दिमाग मारवाड़ी, जो भी घर आया उसे करेक्टर में उतारा प्रतीक की इस जर्नी में उनकी वाइफ ने भी खूब साथ दिया। वे बोले- हमारे घर का ऐसा माला है कि, जो भी घर आएगा, उसे हम कॉन्टेंट के रूप में लेकर आएंगे। मेरा दिमाग मारवाड़ी है, ये ही सोचता हूं कि एक घंटे के लिए भी यदि कोई आया है तो इस पर कैसे वीडियो बनाऊं। सगाई के बाद मैंने अपनी पत्नी को इसके लिए मनाया। इसके बाद उसे 1 महीने की ट्रेनिंग दी और वो अब भी चल रही है। हमनें हमारे यहां आए हर व्यक्ति को ​एक किरदार में बनाया है। वे बोले- जो भी अच्छे दिल और सच्चे मन से करने की कोशिश करते हैं तो जनता उसे स्वीकार करती है। बोले- हेट कमेंट पार्ट ऑफ द जॉब, ब्रेक लेने से मतलब नहीं एक दौर आया जब प्रतीक मुथा को ब्रेक भी लेना पड़ा। प्रतीक बोले- एक समय आया था, जब मुझे किसी वजह से ब्रेक लेना पड़ा। लेकिन, बाद में समझ आया कि कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा- इंटरनेट की दुनिया में मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है। जब भी वीडियो बनाते हैं उन पर आए कमेंट काफी प्रभाव डालते हैं। एक को अच्छा लगेगा तो एक को बुरा। हेट कमेंट पार्ट ऑफ द जॉब है। भास्कर समाधान का बनाया वीडियो, लोगों ने शेयर किए वीडियो प्रतीक के परिवार के 6 लाख फॉलोअर्स हैं, जिनमें उनकी मां और पत्नी भी शामिल हैं। प्रतीक ने भास्कर सामधान ऐप पर परिवार के साथ वीडियो बनाकर उसे शेयर किया। इसमें उनके दादाजी के करेक्टर जो टूटी सड़क की वजह से बाइक पर गिर जाते हैं और परिवार परेशान होता है। पूछता है-कैसे अधिकारियों तक पहुंचेंगे। इस पर प्रतीक ने बताया-हम भास्कर ऐप की मदद से उन अधिकारियों तक पहुंचेंगे। क्योंकि भास्कर समाधान की इस मुहिम से हमारी समस्याएं भी सुनी जाएंगी और उसका समाधान भी होगा।