दलोट की पाटीदार समाज धर्मशाला में चल रही भागवत कथा के छठवें दिन कथा व्यास पं. कमलेश शास्त्री ने अजामिल मुक्ति, रुक्मिणी हरण, सुदामा की निर्धनता और भ्रमर गीत के प्रसंग सुनाए। उन्होंने बताया कि भगवान के नाम में इतनी शक्ति है कि अनजाने में स्मरण करने पर भी पुण्य फल मिलता है। शास्त्री ने अजामिल का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि मृत्यु के समय अजामिल ने अपने बेटा नारायण को पुकारा। इस तरह भगवान का नाम मुख से निकला और उसे मुक्ति का रास्ता मिला। रुक्मिणी हरण प्रसंग में शास्त्री ने बताया कि रुक्मिणी ने एक ब्राह्मण के जरिए कृष्ण को संदेश भेजा था। उन्होंने कृष्ण से कुलदेवी मंदिर से उन्हें अपने साथ ले जाने का आग्रह किया था। इसके बाद कृष्ण रुक्मिणी को लेकर निकले। बलराम ने सेना के साथ दुश्मन सेना का सामना कर रास्ता सुरक्षित किया। सुदामा प्रसंग में बताया गया कि पूर्वजन्म के कर्मों के कारण उन्हें गरीबी मिली थी। लेकिन, श्रीकृष्ण के प्रति उनके निस्वार्थ प्रेम ने उनके जीवन को महान बना दिया। भ्रमर गीत में गोपियों के कृष्ण प्रेम और विरह का वर्णन किया गया। शास्त्री ने कहा कि उनकी भक्ति में कोई स्वार्थ या अपेक्षा नहीं थी। कथा के दौरान श्रद्धालु भावविभोर हो गए। भजन और जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय बना रहा। आखिर में आरती की गई और प्रसाद बांटा गया।