नमस्कार, RLP प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने अपना फोकस फिर राजस्थान पर कर लिया है। सांसद उम्मेदाराम दिल्ली में पेपरलीक को लेकर धरने पर बैठे, इधर उनके लोकसभा क्षेत्र में एग्जाम में चीटिंग हो गई। बेटा अग्निवीर बना तो पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और गुरुजी बन गए ‘पल दो पल के शायर’। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. सांसद से CM हाउस वाला मजाक नागौर सांसद और RLP प्रमुख हनुमान बेनीवाल की पार्टी का राजस्थान विधानसभा में एक भी विधायक नहीं है। लेकिन वे अक्सर दावा करते हैं कि 2028 में कांग्रेस-भाजपा को कड़ी कट्टर देंगे और सत्ता में आएंगे। दिल्ली में उन्होंने जंतर-मंतर जाकर युवाओं को निर्भय होकर सिस्टम का विरोध करने की प्रेरणा दी। खुद भी आदिवासी नेता और सांसद राजकुमार रोत और सांसद चंद्रशेखर के साथ धरने पर बैठे। विधानसभा का रास्ता तय करने के लिए बेनीवाल आदिवासी और दलित समाज के नेताओं के साथ गलबहियां कर रहे हैं। दिल्ली के ताम-झाम के बावजूद वे अपने क्षेत्र को नहीं भूले हैं। नागौर के मेडिकल कॉलेज की दशा का जिक्र करते हुए उन्होंने हेल्थ मिनिस्टर को याद दिलाया कि यह आपका ही गृह जिला है। हाल ही वे युवाओं से स्पष्ट कह चुके हैं कि ऐसा नहीं हो कि बीजेपी से नाराज होकर कांग्रेस की सरकार बनवा दो। आशय साफ था- मैं हूं ना। एक युवा ने हनुमान बेनीवाल के साथ मजाक किया। उसने वीडियो बनाते हुए कहा- दोस्तों, मैं आया हूं CM हाउस और मेरे साथ हैं मुख्यमंत्री। कैमरा घूमते ही हनुमान बेनीवाल हंसते हुए दिखते हैं। 2. धरने पर उधर बैठें या इधर? जैसलमेर-बाड़मेर सांसद उम्मेदाराम दिल्ली पहुंचे। वहां कांग्रेस के धरना-प्रदर्शन में शामिल हुए। पुरजोर तरीके से नीट पेपरलीक को लेकर आवाज उठाई। नारेबाजी की। सड़क पर बैठे। लेकिन इधर राजस्थान में उन्हीं के क्षेत्र में नकल हो गई। जैसलमेर में प्राइवेट कॉलेज में बीए सेकेंड ईयर के हिंदी साहित्य के पेपर में नकल हुई। एग्जाम रूम में दो लेक्चरर स्टूडेंट्स को सवालों के आंसर लिखवा रहे थे। जोधपुर की फ्लाइंट टीम ने उन्हें पकड़ लिया और 93 कॉपियां सील कर दी। अब उम्मेदाराम जी कन्फ्यूज होंगे कि धरना उधर दें या फिर इधर दें। 3. बेटा अग्निवीर बन गया.. हर तरफ से एक ही शोर उठ रहा है- शिक्षा का बेड़ा गर्क हो गया। पिछली सरकार हो या मौजूदा। शिक्षा माफिया अपना जलवा दिखा ही रहे हैं। शिक्षा के मंदिर में बच्चों को चीटिंग करा रहे हैं। पेपर लीक कर देते हैं। फर्जी प्रमाण पत्र बना देते हैं। डमी अभ्यर्थी बैठा देते हैं। चित्तौड़गढ़ के मोहनपुरा गांव के चतुर्भुज चौधरी का 19 साल का बेटा अग्निवीर बन गया। पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। ट्रेनिंग कर गांव लौटे बेटे के स्वागत में उसने 30 किलोमीटर की तिरंगा यात्रा निकाल दी। इतना ही नहीं 47 गांवों के लोगों को जीमने का न्योता दे दिया। बर्फियां तैयार हैं, बूंदियां झर रही हैं। इतना सब कुछ इसलिए क्योंकि ईमानदारी से सरकारी नौकरी पा लेना किसी जंग जीत लेने से कम नहीं। 4. चलते-चलते.. पेपरलीक को चल रहे आंदोलन की बड़ी चर्चा है। दिल्ली में बच्चों पर डंडे पड़ते देखे। कॉकरोच का आंदोलन उस समय सियासी हो गया जब बड़े-बड़े नेता सड़क पर आकर लेट गए। इधर राजस्थान में दिग्गजों को गिरफ्तार किया गया। जिन नेताओं के कार्यकाल में दर्जनों पेपरलीक हुए वे उतनी ही ऊंची आवाज में हो हल्ला मचा रहे। राजधानी में पहले उन्होंने इनका मुख्यालय घेरा, बाद में इन्होंने उनका मुख्यालय घेर लिया। राजनीति की धमा-चौकड़ी में मूल मुद्दा खो जाता है। शिक्षा को नेता नहीं बचा सकते। अगर कोई बचा सकता है तो वो हैं शिक्षक और छात्र। शर्त है ईमानदारी। बांसवाड़ा के छोटी सरवन के सरकारी स्कूल में एक टीचर रहे। नाम- जोरावर सिंह झाला। बच्चों को उन्होंने शिक्षा के साथ-साथ भरपूर स्नेह दिया। जिस स्कूल में नामांकन का संकट रहता था वहां बच्चों की संख्या बढ़ने लगी। स्कूल की इमारत में गीत गूंजने लगे। तबादले निकले तो जोरावर सिंह की भी बदली हो गई। सूचना मिली तो बच्चे रो पड़े। कई तो टीचर से लिपट गए। टीचर ने कहा- रोली लगाकर विदा कर दो। आंसुओं से भरी आंखों के साथ बच्चों ने बारी-बारी से तिलक लगाया। जाते-जाते टीचर ने सीख दी- कल और आएंगे नगमों की खिलती कलियां चुनने वाले, मुझसे बेहतर कहने वाले, तुमसे बेहतर सुनने वाले.. इनपुट सहयोग- प्रकाश तंवर (नागौर), अंकित ढाका (जोधपुर), सिकंदर शेख (जैसलमेर), शिव कुमार भट्ट (रावतभाटा, चित्तौड़गढ़) वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।