डीग में आंगनवाड़ी केंद्रों पर प्रारंभिक बाल शिक्षा को अधिक प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण बनाने के उद्देश्य से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला प्रशासन और रॉकेट लर्निंग संस्था के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का पहला सत्र डीग परियोजना के डीग सेक्टर में संपन्न हुआ। वहीं, डीग में श्री हिंदी पुस्तकालय समिति ने अपने स्थापना के सौवें वर्ष में प्रवेश के उपलक्ष्य में एक भव्य साहित्यकार पुरस्कार एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया। खेल एवं गतिविधि-आधारित शिक्षण पर जोर महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी इंदु सक्सेना ने प्रशिक्षण के दौरान कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे यहां प्राप्त ज्ञान और नवाचारों को आंगनवाड़ी केंद्रों पर प्रभावी ढंग से लागू करें। उन्होंने बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए खेल एवं गतिविधि-आधारित शिक्षण पद्धति अपनाने पर विशेष बल दिया। राजस्थान के सभी जिलों में चल रहा मिशन बुनियाद मिशन बुनियाद के जिला समन्वयक आकाश चौधरी ने बताया कि रॉकेट लर्निंग संस्था, महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से राजस्थान के सभी 41 जिलों में प्रारंभिक एवं पूर्व-प्राथमिक शिक्षा को सशक्त बनाने का कार्य कर रही है। संस्था डिजिटल तकनीक और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से अभिभावकों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर बच्चों के समग्र विकास को बढ़ावा दे रही है। चरणबद्ध तरीके से होंगे प्रशिक्षण कार्यक्रम आकाश चौधरी ने बताया कि मिशन बुनियाद के तहत जिले की सभी परियोजनाओं में चरणबद्ध तरीके से ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पहले प्रशिक्षण सत्र का संचालन भी उन्होंने किया। इन विषयों पर मिला व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रशिक्षण के दौरान खेल-आधारित शिक्षण, शिक्षण सामग्री के प्रभावी उपयोग, सामाजिक एवं भावनात्मक कौशल विकास, सुरक्षित एवं समावेशी शिक्षण वातावरण तथा पूर्व-प्राथमिक शिक्षा को व्यवहारिक रूप से अधिक प्रभावी बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई। ये रहे मौजूद प्रशिक्षण कार्यक्रम में महिला पर्यवेक्षक अपरना परासर सहित महिला एवं बाल विकास विभाग के अन्य कर्मचारी भी मौजूद रहे। हिंदी पुस्तकालय समिति ने साहित्यकारों, मेधावी छात्रों को किया गया सम्मानित डीग में श्री हिंदी पुस्तकालय समिति ने अपने स्थापना के सौवें वर्ष में प्रवेश के उपलक्ष्य में एक भव्य साहित्यकार पुरस्कार एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया। समिति के अरुण सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में ज्ञान, साहित्य और ब्रजभाषा के संरक्षण का संदेश दिया गया। इस अवसर पर हिंदी एवं ब्रजभाषा साहित्य के साहित्यकारों, मेधावी छात्र-छात्राओं, प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल अभ्यर्थियों और पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले पत्रकार को सम्मानित किया गया। समारोह की शुरुआत गायत्री परिवार द्वारा आयोजित हवन-यज्ञ से हुई। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बिहार सरकार के पूर्व मुख्य सचिव और भारत सरकार के पूर्व सचिव अमृत लाल मीना ने अपने संबोधन में कहा कि पुस्तकालयों को सरकार की विभिन्न योजनाओं और कॉरपोरेट क्षेत्र की सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) योजनाओं से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि उनके विकास को नई गति मिल सके। विशिष्ट अतिथि जिला पुलिस अधीक्षक कांबले शरण गोपीनाथ ने कहा कि पुस्तकालय केवल किताबों का संग्रह नहीं होते, बल्कि ज्ञान और संस्कार के केंद्र होते हैं, जो समाज को सही दिशा प्रदान करते हैं। राजस्थान ब्रजभाषा अकादमी की सचिव डॉ. लता श्रीमाली ने बताया कि अकादमी ब्रज क्षेत्र में भाषा और साहित्य के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के लिए सदैव तत्पर है। उन्होंने साहित्यकारों के सम्मान को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। समारोह की अध्यक्षता सिद्धपीठ पीठाधीश्वर कौशल किशोर जी महाराज ने की। उन्होंने अपने प्रेरक उद्बोधन में कवियों, साहित्य और पुस्तकों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें आध्यात्मिकता से जोड़ा और अनेक प्रेरणादायक प्रसंग साझा किए। समिति के सभापति मानसिंह यादव ने स्वागत भाषण दिया, जबकि उपसभापति इंजीनियर लक्ष्मण शर्मा ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन कवि सुरेन्द्र सार्थक ने किया।