कोटा में 40 हजार रुपए के कर्ज के बदले बिजनेसमैन ने 16 साल की बच्ची से घरेलू काम करवा रहा था। सूचना मिलने पर बाल अधिकारिता विभाग की टीम मौके पर पहुंची, जहां बालिका घर पर ही मिली। वहां महिला काउंसलर ने बच्ची बातचीत की। बालिका ने बताया- मैं करीब डेढ़ साल से झाड़ू-पोछा और बर्तन साफ करने सहित घर के अन्य काम करती थी। साथ ही परिवार के छोटे बच्चों की देखभाल भी मुझे से करवाई जाती थी। मामला किशोरपुरा थाना क्षेत्र के वल्लभनगर का है। मामले में अब बिजनेसमैन के खिलाफ गुरुवार शाम को किशोरपुरा थाने में शिकायत दी गई है। माता-पिता ने 40 हजार के कर्ज के बदले काम पर भेजा बाल कल्याण समिति की काउंसलिंग के दौरान नाबालिग ने बताया- मैं केवल कक्षा तीसरी तक पढ़ी है, उसके बाद उसकी पढ़ाई छूट गई। करीब डेढ़ साल पहले उसके माता-पिता ने मुझे यहां काम पर भेज दिया था। नाबालिग ने बताया- मेरे माता-पिता मजदूरी और बैंड-बाजे में लाइट उठाने का काम करते हैं। बिजनेसमैन से 40 हजार रुपए उधार लिए थे, जिसे समय पर न चुका पाने और लगातार ब्याज बढ़ने के कारण उन्होंने मुझे को घरेलू काम के लिए लगा दिया। माता-पिता हर महीने ले जाते थे 9 हजार सैलरी बालिका ने बताया- वह पिछले डेढ़ साल से अपने घर नहीं गई है। वह बिजनेसमैन के घर पर झाड़ू-पोछा, बर्तन साफ करने और छोटे बच्चों को नहलाने-धुलाने समेत उनकी देखरेख का काम करती थी। कभी खाना बनाने वाली नहीं आती थी, तो उसे खाना भी बनाना पड़ता था। मेरे माता-पिता हर महीने आते थे। मेरी 9 हजार रुपए की सैलरी लेकर चले जाते थे। वह वहीं रहकर काम करती है। मा समिति के सामने जताई पढ़ने की इच्छा बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष राजेंद्र राठौड़ ने बताया- मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। काउंसलिंग के दौरान बालिका ने समिति के सामने फिर से पढ़ाई करने और अपना भविष्य बनाने की इच्छा जताई है। समिति अब उसकी शिक्षा और पुनर्वास को लेकर आवश्यक कदम उठाएगी, ताकि उसे फिर से मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।