विद्या प्रचारिणी सभा के सदस्य एवं चित्तौड़गढ़ के पूर्व जिला प्रमुख भेरूसिंह चौहान द्वारा सभा के प्रधान संरक्षक और नाथद्वारा विधायक विश्वराजसिंह मेवाड़ पर की गई कथित अभद्र टिप्पणी को लेकर विवाद गहरा गया है। इस मामले में देवड़ा नोबल्स सोसायटी ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है। सोसायटी अध्यक्ष हरिसिंह देवड़ा ने बताया कि बीएन यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सभा के कुछ सदस्यों ने पूर्व राजपरिवार सदस्य विश्वराजसिंह मेवाड़ के खिलाफ आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का प्रयोग किया। इससे मेवाड़वासियों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की बयानबाजी क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गरिमा के खिलाफ है। सोसायटी पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ लोग मनमाने तरीके से सभा का संचालन कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से मामले में संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई करने की मांग की। भेरू सिंह बोले थे- हमारी पर्सनेलिटी पर घातक है ये महाराणा भेरूसिंह चौहान ने अपने बयान में कहा था कि महाराणा भूपाल सिंह ने शिक्षा संस्थान के लिए यह संपत्ति दान की थी और संस्था लंबे समय से संचालित हो रही है। उन्होंने विश्वराजसिंह मेवाड़ की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कई विवादित टिप्पणियां की थीं। साथ ही सभा के संचालन, एडहॉक कमेटी और प्रशासनिक हस्तक्षेप को लेकर भी आपत्ति जताई थी। उसके बाद उनके पड़पोते (विश्वराजसिंह मेवाड़) ये कह सकते हैं क्या कि मैं चाहूंगा जो ही होगा। हमारी पर्सनेलिटी पर घातक है ये महाराणा। इनके पिता बीजेपी में थे और हम कांग्रेस में थे। इनके कारण हम बीजेपी में आए। ढाई साल बाद ये कांग्रेस में चले गए थे। हमारी तो राजनीति में ऐसी की तैसी हो गई। हालांकि, बयान पर विवाद बढ़ने के बाद अगले ही दिन उन्होंने माफी मांग ली थी। उन्होंने कहा कि विश्वराजसिंह मेवाड़ सभा के सदस्य नहीं हैं।हम मर्यादा के कारण उनको सहन कर रहे हैं। उनकी बनाई ये एडहॉक कमेटी इलीगल है। अगर किसी पुलिस वाले ने हमें फोर्स किया तो गलत होगा। हम कानून में खड़ा कर पुलिस वालों के भी फीते उतरा देंगे। कोई भी इस मामले में गलतफहमी न पाले, अगर किसी ने दादागिरी की तो तलवारें चल जाएंगी। 9 दिन से एमडी, सेक्रेट्री, रजिस्ट्रार ऑफिस के लगे हैं ताले वर्तमान प्रबंधन का कार्यकाल 12 फरवरी 2026 को समाप्त हो चुका था। इसके बाद चुनाव होने थे, लेकिन वर्तमान प्रबंधन द्वारा 54 नए सदस्यों को जोड़ने को लेकर विवाद हो गया था। तब से विद्या प्रचारिणी सभा की पूर्व कार्यकारिणी और मुख्य संरक्षक द्वारा गठित एडहॉक कमेटी के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। इनके अधिकारों को लेकर मामला फिलहाल कोर्ट में है। 27 अप्रैल को अगली सुनवाई होनी है। दरअसल, 15 अप्रैल को एडहॉक कमेटी चार्ज लेने पहुंची तो सभा के एमडी, फाइनेंस सेक्रेट्री, रजिस्ट्रार और आॅडिटर चैम्बर के ताले लगे मिले थे। तब से अब तक इन ऑफिसेज के ताले नहीं खुले हैं। ऐसे में एडमिशन सहित अन्य प्रशासनिक काम ठप है। परीक्षा, मैनेजमेंट सहित छात्रों की समस्याओं का हल नहीं हो पा रहा है।