धार में जुमे की नमाज को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं हो सकी है। गुरुवार देर रात जिला प्रशासन और मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों के बीच करीब दो घंटे तक बैठक चली, लेकिन नमाज के वैकल्पिक स्थान को लेकर सहमति नहीं बन पाई। इसके चलते शुक्रवार को प्रशासन द्वारा निर्धारित मालीवाड़ा में चालीसपीर दरगाह के पास जुमे की नमाज अदा करने के लिए कोई नहीं पहुंचा। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन और पुलिस की ओर से मौके पर सभी इंतजाम किए गए थे। धार के सदर अब्दुल समद ने कहा- प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं कर रहा है। चालीसपीर दरगाह के पास निर्धारित स्थान पर नमाज नहीं पढ़ी जाएगी। इसके बजाय जुमे की नमाज आसपास की मस्जिदों में अदा की जाएगी। मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में फिर सुनवाई तय है। देखिए, दो तस्वीरें… सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला के पास जगह देने के लिए कहा था इससे पहले बीती 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया था कि हर शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान मुहैया कराया जाए। इसके बाद जिला प्रशासन ने मालीवाड़ा गांव में चालीसपीर दरगाह के पास नमाज की जगह निर्धारित की थी, लेकिन मुस्लिम समुदाय ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष ने दलील दी थी कि प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराया गया स्थान भोजशाला से करीब दो किलोमीटर दूर है और यह कोर्ट के आदेश की भावना के अनुरूप नहीं है। इस पर अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को भोजशाला परिसर के बाहर या उससे सटे क्षेत्र में वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का नया प्रस्ताव भी ठुकराया सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन ने गुरुवार रात मुस्लिम समुदाय को चर्चा के लिए बुलाया और अन्य संभावित स्थानों का प्रस्ताव रखा। इन प्रस्तावों को भी अस्वीकार कर दिया गया। मुस्लिम समाज का कहना है कि उन्हें उनके पारंपरिक स्थान पर ही नमाज अदा करने की अनुमति दी जाए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में भी नमाज के लिए भोजशाला के नजदीक स्थान उपलब्ध कराने की बात कही गई है। दावा- पहले भी कभी नहीं बिगड़ा माहौल सदर अब्दुल समद का कहना है कि जब भोजशाला परिसर में नमाज होती थी, तब भी कभी कानून-व्यवस्था की स्थिति नहीं बिगड़ी। नमाज बंद होने के बाद भी कोई विवाद नहीं हुआ, इसलिए इतनी दूर वैकल्पिक व्यवस्था का कोई औचित्य नहीं है। सदर ने पुरानी घटना का जिक्र करते हुए बताया कि इससे पहले 23 जनवरी को बसंत पंचमी के मौके पर प्रशासन ने जिस जगह पर डमी नमाज कराई थी, वह दरअसल कब्रिस्तान की जमीन है। उस समय भी मुस्लिम समाज ने इस पर आपत्ति जताई थी, क्योंकि कब्रिस्तान में जुमे की नमाज अदा नहीं की जाती। यह पक्ष भी सुप्रीम कोर्ट के सामने मजबूती से रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को अपने आदेश में क्या कहा था? हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के हरिशंकर जैन, राष्ट्रीय अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री और अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन के साथ अधिवक्ता विनय जोशी के नेतृत्व में 2 मई 2022 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में याचिका नंबर 10497/2022 दायर की गई थी। इस मामले में याचिकाकर्ता रंजना अग्निहोत्री, आशीष गोयल, आशीष जनक, मोहित गर्ग और सुनील सारस्वत को 15 मई 2026 को हाई कोर्ट से राहत मिली थी। इसके खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिस पर 14 जुलाई को सुनवाई हुई। मामले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… भोजशाला के बिलकुल पास दें नमाज की जगह धार की ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में जुमे की नमाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि कोर्ट के 14 जुलाई के अंतरिम आदेश का केवल औपचारिक नहीं, बल्कि उसकी मूल भावना के अनुरूप अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए। पढ़ें पूरी खबर…