नीट पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा 25 जुलाई को हुआ। हालांकि, इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस्तीफे से पहले केंद्र सरकार ने छात्रों के प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से एक समझौते की कोशिश की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार चाहती थी कि धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्रालय से हटाकर किसी दूसरे मंत्रालय की जिम्मेदारी दे दी जाए, ताकि वे कैबिनेट में बने रहें। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने CJP के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका से संपर्क किया था। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान सरकार ने पूछा था कि अगर प्रधान का मंत्रालय बदल दिया जाए तो क्या आंदोलन खत्म हो जाएगा। हालांकि, CJP नेताओं ने यह ऑफर ठुकरा दिया। उनका कहना था कि मंत्रालय बदलना नहीं, बल्कि धर्मेंद्र प्रधान का पूरी तरह इस्तीफा ही उनकी मुख्य मांग है और इस पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इस्तीफे से 48 घंटे पहले BJP में शुरू हो गई थी इस्तीफे की चर्चा रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत के लिए कोई औपचारिक माध्यम नहीं था। इसी वजह से दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बढ़ता गया और कोई सहमति नहीं बन सकी। बाद में बढ़ते राजनीतिक दबाव, संसद में लगातार हंगामे और छात्रों के आंदोलन के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। रिपोर्ट के अनुसार, इस्तीफे से 48 घंटे पहले भाजपा के भीतर चर्चा शुरू हो गई थी। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना था कि बढ़ते जन आक्रोश और संसद में हंगामे के बीच प्रधान का शिक्षा मंत्री बने रहना मुश्किल हो गया है। प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।