धौलपुर के बसेड़ी उपखंड के हरजूपुरा निवासी किसान भीकम सिंह ने आरोप लगाया है कि जिला कलेक्टर के निर्देशों के बावजूद उनकी कृषि भूमि का सीमाज्ञान नहीं कराया गया तथा कथित अतिक्रमण के संबंध में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। किसान ने राजस्व अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष एवं वैज्ञानिक तरीके से सीमाज्ञान कराने तथा भूमि का कब्जा दिलाने की मांग की है। किसान का दावा : आदेशों के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
किसान भीकम सिंह के अनुसार उन्होंने 2 जुलाई 2026 को जिला कलेक्टर को ज्ञापन देकर खाता संख्या 240 एवं खसरा संख्या 3289 से 3295 तक स्थित अपनी कृषि भूमि का सीमाज्ञान कराने तथा कथित अतिक्रमण हटवाने की मांग की थी। उनका आरोप है कि जिला कलेक्टर के निर्देशों के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। किसान का कहना है कि 6 जुलाई को राजस्व टीम मौके पर पहुंचे, लेकिन सीमाज्ञान किए बिना ही लौट गए। किसान के अनुसार उन्हें बताया गया कि यह माप स्थानीय स्तर पर संभव नहीं है तथा जिला स्तर पर आधुनिक तकनीक से सर्वेक्षण कराया जाएगा। किसान का आरोप है कि राजस्व अधिकारियों ने जानबूझकर कार्रवाई नहीं की और इस संबंध में उन्होंने मिलीभगत के आरोप भी लगाए हैं।
किसान का पक्ष
किसान का कहना है कि उनकी भूमि की सीमाएं राजस्व रिकॉर्ड एवं मसावी नक्शे में स्पष्ट अंकित हैं। उनका दावा है कि मौके पर कुएं, पुराने वृक्ष तथा अन्य स्थायी चिन्ह मौजूद हैं, जिनके आधार पर सीमाज्ञान संभव है। उन्होंने प्रशासन से आधुनिक तकनीक के माध्यम से निष्पक्ष सीमाज्ञान कराकर कथित अतिक्रमण हटाने और कब्जा दिलाने की मांग की है। राजस्व विभाग का पक्ष : मौके की वास्तविक स्थिति में सीमाज्ञान संभव नहीं
राजस्व विभाग के अनुसार जिला कलेक्टर के निर्देशों की पालना में 6 जुलाई 2026 को संबंधित राजस्व अभिलेख, जमाबंदी, शजरा/मसावी नक्शा तथा उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर मौके का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान प्रार्थी, संबंधित पक्षकार एवं ग्रामीण उपस्थित थे तथा मौके पर मौका पर्चा भी तैयार किया गया। विभाग के अनुसार निरीक्षण में पाया गया कि विवादित भूमि पटवार हल्का धौर्र एवं कांकोर की राजस्व सीमा के निकट स्थित है। उपलब्ध मसावी नक्शे एवं धरातलीय स्थिति के मिलान में दोनों राजस्व ग्रामों की सीमा स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं हो सकी तथा सीमा क्षेत्र में बाउंड्री ओवरलैप (Boundary Overlap) की स्थिति पाई गई। ऐसे में संबंधित खसरों का निर्विवाद सीमाज्ञान मौके पर करना संभव नहीं था। राजस्व विभाग का कहना है कि निरीक्षण के समय विवादित भूमि पर प्रार्थी का वास्तविक भौतिक कब्जा नहीं पाया गया। मौके पर अन्य व्यक्तियों का दीर्घकालीन कब्जा, कृषि कार्य, निर्माण, चारदीवारी, मेड़ एवं वृक्षारोपण पाया गया, जिनके संबंध में संबंधित राजस्व अभिलेख भी उपलब्ध हैं।
विधिक स्थिति
राजस्व अधिकारियों के अनुसार राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 128 के अंतर्गत सीमाज्ञान का उद्देश्य केवल भूमि की सीमा का प्रशासनिक निर्धारण करना है। इस प्रक्रिया में स्वामित्व, खातेदारी अथवा कब्जे से जुड़े विवादों का अंतिम निर्णय नहीं किया जा सकता। विभाग का कहना है कि जब दो राजस्व ग्रामों की सीमा अस्पष्ट हो, सीमा ओवरलैप की स्थिति हो अथवा कब्जे एवं खातेदारी को लेकर विवाद हो, तब ऐसे मामलों का अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय अथवा सक्षम प्राधिकारी द्वारा ही किया जा सकता है। वर्तमान परिस्थितियों में उपलब्ध रिकॉर्ड एवं मौके की स्थिति के आधार पर वैज्ञानिक एवं विधिसम्मत सीमाज्ञान करना संभव नहीं पाया गया।
मौका पर्चे में भी दर्ज है यही स्थिति
राजस्व विभाग के अनुसार मौके पर तैयार किए गए मौका पर्चे में भी उल्लेख किया गया है कि दोनों राजस्व ग्रामों की सीमा स्पष्ट न होने तथा सीमा क्षेत्र में ओवरलैप की स्थिति के कारण तत्काल सीमाज्ञान करना संभव नहीं है। विभाग का कहना है कि यदि भविष्य में सक्षम प्राधिकारी द्वारा दोनों राजस्व ग्रामों की सीमा स्पष्ट कर दी जाती है अथवा न्यायालय से आवश्यक आदेश प्राप्त होते हैं, तो नियमानुसार आगे की सीमाज्ञान एवं राजस्व कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की ओर से
फिलहाल किसान द्वारा लगाए गए मिलीभगत एवं लापरवाही के आरोप उनके व्यक्तिगत आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, राजस्व विभाग का कहना है कि कलेक्टर के निर्देशों की पालना में मौका निरीक्षण किया गया तथा उपलब्ध राजस्व अभिलेखों, मौके की वास्तविक स्थिति और विधिक प्रावधानों के अनुरूप कार्यवाही की गई। प्रकरण वर्तमान में राजस्व एवं विधिक प्रक्रिया के अधीन है।