राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देश पर जिले में 'ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूसडे' विशेष अभियान मंगलवार को शुरू किया गया। जिला एवं सेशन न्यायाधीश संजीव मागो की अध्यक्षता में धौलपुर मुख्यालय सहित बाड़ी, राजाखेड़ा, बसेड़ी और सैंपऊ के विभिन्न स्कूलों में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किए गए। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य स्कूली छात्रों को उनके विधिक अधिकारों, कर्तव्यों और विशेष रूप से साइबर सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों के प्रति जागरूक करना है। जिले के विभिन्न न्यायिक अधिकारियों ने अलग-अलग स्कूलों में पहुंचकर विद्यार्थियों को सरल और प्रभावी ढंग से जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम में अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान डिजिटल युग में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। ऑनलाइन ठगी, फिशिंग, सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग, फर्जी कॉल, लॉटरी स्कैम और साइबर बुलिंग जैसे अपराधों से बचाव के लिए सतर्कता आवश्यक है। विद्यार्थियों को अनजान लिंक पर क्लिक न करने और बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करने की सलाह दी गई। न्यायिक अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी सार्वजनिक करने से बचना चाहिए और केवल परिचित लोगों से ही संपर्क रखना चाहिए। किसी भी प्रकार की ऑनलाइन धमकी, ट्रोलिंग या अभद्र व्यवहार एक दंडनीय अपराध है, जिसकी सूचना तुरंत अभिभावकों या शिक्षकों को देनी चाहिए। इस दौरान सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 के प्रावधानों की भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराधों में दोषी पाए जाने पर सख्त सजा का प्रावधान है। बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री का निर्माण या प्रसारण एक गंभीर अपराध माना जाता है। शिविरों में विद्यार्थियों को प्रश्न पूछने का अवसर मिला और उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। स्कूलों में "कोर्ट वाली दीदी" नामक सुझाव पेटिका भी स्थापित की गई है। अधिकारियों ने अपने संदेश में कहा, “डिजिटल युग में जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। थोड़ी सी सावधानी से बड़े नुकसान से बचा जा सकता है।”