धौलपुर के तीर्थराज मचकुंड पर देव छठ मेले में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हरियाणा समेत कई राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मचकुंड पहुंच रहे हैं। पवित्र सरोवर में नहाने और पूजा-पाठ के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हैं। यह भीड़ करीब तीन किलोमीटर दूर तक नजर आ रही है। देव छठ मेले में नवविवाहिताओं की पारंपरिक धार्मिक रस्म भी देखने को मिल रही है। स्थानीय परंपरा के अनुसार, शादी के बाद नवविवाहिताओं के सिर पर पहनी जाने वाली कलिंगिया (जिसे स्थानीय तौर पर मोहरी भी कहते हैं) का विसर्जन मचकुंड सरोवर में किया जाता है। इस परंपरा के तहत बड़ी संख्या में नवविवाहिताएं मचकुंड पहुंच रही हैं और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ कलिंगिया विसर्जित कर रही हैं। धौलपुर का तीर्थराज मचकुंड प्राचीन धार्मिक आस्था का एक अहम केंद्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसका संबंध राजा मचकुंड से है। देव छठ के मौके पर श्रद्धालु मचकुंड सरोवर में नहाकर पूजा-पाठ करते हैं और धार्मिक परंपराओं में हिस्सा लेते हैं। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के कारण पूरे इलाके में भक्तिमय माहौल बना हुआ है। इससे पहले ऋषि पंचमी के मौके पर भी मचकुंड पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। देव छठ के मौके पर लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या से मेले में उत्साह और आस्था का माहौल बना हुआ है। मेले की व्यवस्थाओं को लेकर मेला मजिस्ट्रेट और एसडीएम सुरेश राव लगातार निगरानी कर रहे हैं। सुरेश राव बार-बार घाटों पर जाकर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं और श्रद्धालुओं से बात कर रहे हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की है कि मचकुंड में गहरा पानी होने के कारण गहरे पानी में न जाएं और प्रशासन की तरफ से तय की गई जगहों पर ही स्नान करें। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इंतजाम किए हैं। मेला मजिस्ट्रेट सुरेश राव की निगरानी में देव छठ मेले का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ जारी है।