राजस्थान में तबादला प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लग चुकी है। हाल ही में हुए तबादलों को लेकर कर्मचारियों और अधिकारियों की नाराजगी लगातार सामने आ रही है। अब शिक्षा विभाग का एक मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। धौलपुर जिले के एक सरकारी स्कूल में कार्यरत हेड मास्टर ने अपने तबादले से नाराज होकर सोशल मीडिया पर लंबी पोस्ट लिखी है, जिसमें उन्होंने खुद को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का कार्यकर्ता बताते हुए भारतीय जनता पार्टी के लिए किए गए अपने योगदान का जिक्र किया है। साथ ही शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर भी नाराजगी जताई है। धौलपुर जिले के सरकारी स्कूल में हेड मास्टर के पद पर कार्यरत ओमवीर पेलावत ने सोशल मीडिया पर लिखी पोस्ट में दावा किया कि उनके पिता भारतीय जनता पार्टी के ईमानदार कार्यकर्ता रहे हैं। इस बात की जानकारी पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को भी है। उन्होंने यह भी लिखा कि वह खुद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय वर्ष शिक्षित कार्यकर्ता हैं। भाजपा के जिला प्रमुख और प्रधान बनाने में कई बार वह अहम भूमिका निभा चुके हैं। पोस्ट में उन्होंने लिखा- पहली बार उन्हें अपनी व्यक्तिगत समस्या को सार्वजनिक करना पड़ रहा है। उनके अनुसार उन्होंने पदोन्नति स्वीकार की, लेकिन इसके बाद 59 वर्ष की उम्र में उनका तबादला धौलपुर से करीब 500 किलोमीटर दूर झालावाड़ कर दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें रिक्त पद पर स्थानांतरण नहीं दिया गया। वह अब स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) लेने पर विचार करेंगे। साथ ही उन्होंने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को संबोधित करते हुए लिखा कि उनकी जिद भविष्य में भाजपा के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और इस पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कोई शिक्षक की पीड़ा का समर्थन कर रहा है तो कोई सरकारी तबादला प्रक्रिया को नियमों के अनुसार होने की बात कह रहा है। कैबिनेट मंत्री के बेटे का ट्रांसफर हुआ कैंसिल राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत के बेटे दीपक कुमावत के तबादले को लेकर भी सोशल मीडिया पर विवाद छिड़ गया है। 9 जुलाई को पंचायत समिति सुमेरपुर (पाली) में सहायक प्रोग्रामर के पद पर कार्यरत दीपक कुमावत का तबादला पंचायत समिति जालौर किया गया था, लेकिन महज 24 घंटे बाद 10 जुलाई को आदेश निरस्त कर उन्हें यथावत पदस्थापित कर दिया गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर मंत्री और उनके बेटे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। यूजर्स इस फैसले को लेकर सवाल उठा रहे हैं और तबादला प्रक्रिया में कथित दोहरे मापदंड अपनाने के आरोप लगाते हुए सरकार पर निशाना साध रहे है। बता दें कि राजस्थान में हाल ही में विभिन्न विभागों में बड़े स्तर पर तबादले किए गए थे। इसके बाद कई कर्मचारी और अधिकारी अपने तबादलों को लेकर असंतोष जता चुके हैं। अब इस शिक्षक की पोस्ट ने तबादला प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है।