मैं RSS का कार्यकर्ता हूं। भाजपा के जिला प्रमुख और प्रधान बनाने में कई बार अहम भूमिका निभा चुका हूं। लेकिन 59 की उम्र में मेरा तबादला धौलपुर से करीब 500 किलोमीटर दूर झालावाड़ कर दिया गया। माननीय शिक्षा मंत्री जी आपकी जिद्द बीजेपी को ले डूबेगी। यह दर्द धौलपुर जिले के एक सरकारी स्कूल में कार्यरत हेड मास्टर ओमवीर पेलावत (59) का है। उन्होंने ट्रांसफर पर नाराजगी जाहिर करते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट की है। वहीं राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत के बेटे दीपक कुमावत के तबादले को लेकर भी सोशल मीडिया पर विवाद छिड़ गया है। 9 जुलाई को पंचायत समिति सुमेरपुर (पाली) में सहायक प्रोग्रामर के पद पर कार्यरत दीपक कुमावत का तबादला पंचायत समिति जालोर किया गया था, लेकिन महज 24 घंटे बाद 10 जुलाई को आदेश निरस्त कर उन्हें यथावत पदस्थापित कर दिया गया। दीपक कुमावत का ट्रांसफर कैंसिल होने के बाद सोशल मीडिया पर मंत्री और उनके बेटे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। यूजर्स इस फैसले को लेकर सवाल उठा रहे हैं और तबादला प्रक्रिया में कथित दोहरे मापदंड अपनाने के आरोप लगाते हुए सरकार पर निशाना साध रहे हैं। बता दें कि राजस्थान में हाल में अलग-अलग विभागों में बड़े स्तर पर तबादले किए गए थे। इसके बाद कई कर्मचारी और अधिकारी अपने तबादलों को लेकर असंतोष जता चुके हैं। अब टीचर की पोस्ट ने तबादला प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सरकारी टीचर की पोस्ट… ट्रांसफर से नाराज टीचर ने कहा- वीआरएस पर विचार करेंगे हेड मास्टर ओमवीर पेलावत (59) का ट्रांसफर धौलपुर से करीब 500 किलोमीटर दूर झालावाड़ कर दिया गया है। वे इससे नाराज हैं। उन्होंने इसको लेकर अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट की है। जिसमें में लिखा है- मेरे पिता जी भारतीय जनता पार्टी के इमानदार कार्यकर्ता रहे हैं, इस बात को सम्माननीया वसुंधरा राजे जी जानती हैं। मैं भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का द्वितीय वर्ष शिक्षित कार्यकर्ता हूं। मैंने भी कई बार भाजपा का जिला प्रमुख और प्रधान बनाने में अहम भूमिका निभाई है। मैंने प्रमोशन स्वीकार कर लिया और मुझे 59 साल की उम्र में 500 किलोमीटर दूर झालावाड़ भेज दिया। दुर्भाग्य ये रहा कि मेरा रिक्त स्थान पर भी ट्रांसफर नहीं किया। खैर मैं तो बीआरएस ले लूंगा। लेकिन माननीय शिक्षा मंत्री जी आपकी जिद्द बीजेपी को ले डूबेगी। हेडमास्टर की इस पोस्ट पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कोई शिक्षक की पीड़ा का समर्थन कर रहा है तो कोई सरकारी तबादला प्रक्रिया को नियमों के अनुसार होने की बात कह रहा है।