डीडवाना के गणपति नगर स्थित कुआं खेजड़ी वाले बालाजी मंदिर परिसर में शनिवार को श्रीमद्भागवत गीता कथा का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। कथा का वाचन वृंदावन के कथावाचक गोविंद किशोर पांडे कर रहे हैं। यह कथा प्रतिदिन आयोजित की जा रही है। मुख्य यजमान महेश कुमार अग्रवाल ने बताया कि कथा के दौरान गोविंद किशोर पांडे ने श्रीमद्भागवत के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भागवत कथा का श्रवण मनुष्य को अलौकिक शांति प्रदान करता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है। कथावाचक ने बताया कि कलयुग में सत्य, तप, दया, दान और सदाचार जैसे मानवीय मूल्यों में कमी आई है। ऐसे समय में श्रीमद्भागवत ही जीवन को सही दिशा देने का सबसे श्रेष्ठ माध्यम है। पांडे ने कहा कि जो व्यक्ति भगवान की शरण ग्रहण कर लेता है, उसका कोई अहित नहीं कर सकता। उन्होंने गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गुरु वही होना चाहिए जिसने स्वयं भगवान की कृपा प्राप्त की हो। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि जिस प्रकार वर्षा से पहले उमस होती है, उसी प्रकार मनुष्य के भीतर का तप उसे भगवान से जोड़ता है। यह आंतरिक तपस्या ही व्यक्ति को ईश्वर के करीब लाती है। कथावाचक ने यह भी कहा कि व्यक्ति की वृत्ति ही उसे देवतुल्य या राक्षसी बनाती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्वभाव, चरित्र और आचरण को श्रेष्ठ बनाने का प्रयास करना चाहिए, ताकि समाज उसके जीवन से प्रेरणा ले सके। कथा के दौरान श्रीमद्भागवत के महात्म्य से जुड़े अनेक प्रसंग, दृष्टांत और उद्धरण प्रस्तुत किए गए। उन्होंने भगवद्गीता में वर्णित सांख्य दर्शन के त्रिगुणात्मक सिद्धांत की भी सरल और प्रभावी व्याख्या की। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर भक्ति भाव से कथा श्रवण किया और धर्म लाभ प्राप्त किया।