डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) पर उद्योगपतियों की आईडी से छेड़छाड़ कर 400 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा हुआ है। जयपुर साइबर सेल ने फर्जी दस्तावेज और ऑनलाइन KYC कराने वाले गिरोह के 5 आरोपियों को जोधपुर से पकड़ा है। देश में इस तरह का यह संभवत: पहला बड़ा मामला है। पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में निर्मल सोनी कंटालिया (पाली), सुल्तान, नंदकिशोर, अशोक भंडारी और प्रमोद खत्री जोधपुर के रहने वाले हैं। सरगना फरार है। स्पेशल सीपी ओम प्रकाश ने बताया कि दिसंबर 25 में उद्योगपति सौरभ बाफना ने शिकायत दी थी कि उनके ICEGATE पोर्टल से 17.88 लाख की स्क्रिप्स म्यूल IEC में ट्रांसफर हो गईं। जांच में सामने आया कि उनके अकाउंट से अब तक 93 लाख रुपए की स्क्रिप्स चोरी हो चुकी हैं। डिजिटल सिग्नेचर दुबई में डाउनलोड कर वहीं से फर्जी लॉगइन किए जाते थे। इसके जरिए निर्यातकों के खातों से ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्स म्यूल अकाउंट में ट्रांसफर कर दी जाती थीं। दिल्ली में सक्रिय एजेंट इन्हें सस्ते दाम पर बेचते थे। एजेंसियों को आशंका है कि इस नेटवर्क से 400 करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी हो चुकी है। ठगी के बाद हवाला के जरिए पैसों का ट्रांसफर करते थे। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस और आईटी एक्ट सहित अन्य एक्ट की 24 धाराओं में साइबर थाने में केस दर्ज किया है। स्पेशल कमिश्नर ओम प्रकाश के मुताबिक, आरोपी सुल्तान ने पूछताछ में बताया कि दिल्ली और यूपी से आने वाले लोग कमीशन देकर फर्जी ऑनलाइन KYC करवाते थे। नेटवर्क खंगालने के लिए 3 IPS अधिकारियों के सुपरविजन में करीब 20 साइबर एक्सपर्ट लगाए गए हैं। भास्कर एक्सप्लेनर- फर्जी सिग्नेचर दुबई में डाउनलोड होते थे 1. कैसे सेंध लगा रहे थे? ठगों ने फर्जी आधार-पैन से ‘डिजिटल सिग्नेचर’ बनवाए। इससे सरकारी पोर्टल पर लॉग-इन कर असली मालिकों की प्रोफाइल में अपनी ईमेल-मोबाइल नंबर डाल दिए और एक्सेस ले लिया। 2. ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्स? निर्यात के बदले सरकार व्यापारियों को टैक्स भरपाई के लिए ‘डिजिटल मुद्रा’ देती है, जिसे ‘ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्स’ कहते हैं। इसका उपयोग सीमा शुल्क चुकाने में होता है। यही चोरी हुआ। 3. जाल कहां तक फैला? यह एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह है। इसके सदस्य दिल्ली, यूपी और राजस्थान में सक्रिय थे, जबकि फर्जी सिग्नेचर दुबई में डाउनलोड करके खाते चलाते थे। 4. स्क्रिप्स का क्या किया? हैक खातों से स्क्रिप्स कई फर्जी खातों में घुमाया जाता था। अंत में, इन्हें अन्य व्यापारियों को सीमा शुल्क चुकाने के लिए सस्ते दामों पर बेचकर नकदी वसूलते थे। 5. क्या कमियां निकलीं? इस कांड ने डिजिटल सिग्नेचर अथॉरिटी और सरकारी पोर्टल के बीच समन्वय की कमी को उजागर किया है। अब डीजीएफटी और आई 4C सहित सभी केंद्रीय एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया है।