अंदरूनी शहर में सीवरेज लाइन का आए दिन ब्लॉक होना और इससे फैल रही गंदगी सबसे बड़ी समस्या है। इसका समाधान स्मार्ट सिटी और नगर निगम के लिए चुनौती बना हुआ है। इससे निकली गंदगी सड़कों व झीलों में फैल रही है। इससे शहर की छवि और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। इस समस्या की मुख्य वजह होटल और रेस्टोरेंट हैं। नगर निगम के अनुसार, अंदरूनी शहर में 174 होटल व रेस्टोरेंट में से 143 में तो ग्रीस चेंबर ही नहीं है। यानी हर 10 में से 8 होटल-रेस्टोरेंट बिना ग्रीस चैंबर के चल रहे हैं। इनसे निकली गंदगी और कचरा सीवर लाइन से मेन ड्रेन तक पहुंच कर फंस जाता है। ड्रेन ब्लॉक होने से गंदगी सड़क पर फैल रही है। इसको लेकर निगम 143 होटल व रेस्टोरेंट संचालकों को नोटिस दे चुका है। आयुक्त अभिषेक खन्ना ने बताया कि ग्रीस चैंबर नहीं लगाने वाले होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को नोटिस दिए जा चुके हैं। नियमों की पालना नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इनके लाइसेंस भी रिन्यू नहीं किए जाएंगे। हालांकि हकीकत यह है कि कई सालों से सीवर जाम की समस्या है। लेकिन, स्मार्ट सिटी और निगम नोटिस व चेतावनी से आगे नहीं बढ़ पाए हैं। खास बात यह है कि निगम हमेशा सर्वे कर होटल-रेस्टोरेंट में ग्रीस चेंबर नहीं होने की लिस्ट तैयार कर लेता है। लेकिन, किसी होटल या रेस्टोरेंट पर कड़ी कार्रवाई नहीं की है। इसी वजह से समस्या बढ़ती जा रही है और इसका स्थायी समाधान नहीं है। समस्या : मेन-ड्रेन में जोड़ देते हैं सीवर लाइन का कनेक्शन शहर में 1800 से अधिक होटल-रेस्टोरेंट हैं, जिनमें 500 अंदरूनी शहर व झीलों के आसपास हैं। कई पुराने भवनों में ग्रीस चैंबर नहीं होने से तेल, सब्जियां और खाद्य अवशेष सीधे सीवर लाइन में पहुंचकर उसे बार-बार जाम कर रहे हैं। इससे गंदगी सड़कों पर फैलकर झीलों में पहुंच रही है। मानसून में स्थिति और गंभीर होगी, जिससे जल प्रदूषण बढ़ने के साथ दो लाख आबादी और पर्यटकों पर बीमारी का खतरा भी मंडरा रहा है। हल : ग्रीस चैंबर लगाएं, यह रसोई के कचरे को रोकता है ग्रीस चैंबर रसोई से निकलने वाले तेल, चिकनाई व खाद्य कचरे को रोकता है। गंदगी चैंबर में जमा हो जाती है और सिर्फ पानी फिर पानी निकलकर मेन ड्रेन में चला जाता है। ग्रीस चैंबर कचरे को रोककर पानी के प्रदूषण को भी कम करता है। इसे बनाने में 50 हजार से 2 लाख तक खर्च होते हैं। बड़े होटल में 1.50 से 2 लाख में और छोटे होटल में साधारण चैंबर बनाने में 50 हजार से 1 लाख तक लगते हैं।