खाद्य एवं डेयरी उद्योग में नवाचार, आधुनिक तकनीक, स्टार्टअप और सतत विकास की संभावनाओं पर चर्चा के लिए शनिवार को दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार शुरू हुआ। कॉलेज ऑफ डेयरी एंड फूड टेक्नोलॉजी (सीडीएफटी), उदयपुर और सीडीएफटी एलुमनाई एसोसिएशन के साझे में राजस्थान कृषि महाविद्यालय परिसर स्थित महाराणा प्रताप सभागार में आयोजित इस सेमिनार में देश-विदेश के 500 से अधिक वैज्ञानिक, शोधार्थी और उद्योग प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इनोवेशन, टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप एवं सस्टेनेबिलिटी-खाद्य एवं डेयरी उद्योग का अगला दशक विषयक आयोजन का मूल सूत्र रीकनेक्ट, रिजुवेनेट, रीइमैजिन है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए एमपीयूएटी के कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में खाद्य एवं डेयरी उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। इस क्षेत्र में शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक और कौशल विकास के जरिए रोजगार, स्वरोजगार एवं स्टार्टअप के अवसर अपनाने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान खाद्य एवं डेयरी प्रौद्योगिकी में नवीन अनुसंधान, आधुनिक तकनीक और सतत विकास पर आधारित स्मारिका का विमोचन किया गया। इसमें क्षेत्र की शोध उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं को शामिल किया गया है। इस दौरान डॉ. लोकेश गुप्ता, डॉ. मनोज कुमार महला, डॉ. एलएन महावर और डॉ. प्रकाश पंवार आदि मौजूद रहे। विशेषज्ञों ने वैश्विक सफलता के मंत्र बताए उद्घाटन सत्र में एक फूड कंपनी के प्रतिनिधि विनय दीक्षित ने कंपनी की व्यावसायिक यात्रा और 90 देशों तक हुए विस्तार की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अनुसंधान एवं विकास के जरिए उत्पादों में लगातार नवाचार किया गया। बेसन की जगह मोठ की दाल का उपयोग कर नमकीन तैयार करना महत्वपूर्ण नवाचार साबित हुआ। गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की बदलती जरूरतों के अनुरूप उत्पादों में बदलाव से कंपनी को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान बनाने में मदद मिली। उन्होंने अनुसंधान, नवाचार और गुणवत्ता को वैश्विक सफलता का मंत्र बताया। वहीं एक अन्य फूड कंपनी के प्रतिनिधि अशोक गोयल ने समूह की व्यावसायिक यात्रा साझा करते हुए बताया कि छोटे स्तर से शुरू हुए कारोबार ने अनुसंधान, विकास और नवाचार के दम पर फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में पहचान बनाई। प्रोटीन आधारित नए उत्पादों से कारोबार को विस्तार मिला।