नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ ही जिले के बुक स्टोर्स पर कमीशन का मेला शुरू हो गया है। अभिभावक अपनी मेहनत की कमाई को निजी स्कूलों और प्रकाशकों की सेटिंग की भेंट चढ़ा रहे हैं। आलम यह है कि जिस क्लास की पूरी पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय में 800 रुपए में निपट रही है, निजी स्कूलों में उसी पढ़ाई के लिए अभिभावकों को 4000 रुपए तक देने पड़ रहे हैं। जिले में सीबीएसई से संबद्ध निजी स्कूलों में एक ही बोर्ड होने के बावजूद अलग-अलग सिलेबस लागू किए जा रहे हैं। किताबों के लिए 5 से 10 गुना तक अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। केंद्रीय विद्यालयों (केवी) में जहां एक कक्षा का पूरा सिलेबस 200 से 800 रुपए में उपलब्ध है, वहीं जिले के निजी सीबीएसई स्कूलों में यही सिलेबस 1500 से 4000 रुपए तक पहुंच गया है। तीसरी से पांचवीं कक्षा तक के स्तर पर केवी में करीब 300 रुपए में मिलने वाला पाठ्यक्रम निजी स्कूलों में 1500 से 2500 रुपए तक बेचा जा रहा है। सिर्फ 15% एनसीईआरटी, बाकी कमीशन वाली किताबें सीबीएसई के स्पष्ट निर्देश हैं कि स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें लागू हों। लेकिन जिले के 184 स्कूलों ने इस नियम का तोड़ निकाल लिया है। जिले में 2 लाख छात्र हैं। यदि औसतन एक छात्र के सिलेबस पर स्कूल 500 रुपए भी कमीशन लेता है, तो यह सीधा 10 करोड़ रुपए का खेल है। अभिभावकों की 3 बड़ी तकलीफें > बंडल की मजबूरी: बुक डिपो वाले फुटकर किताबें नहीं देते। पूरा सेट लेना ही होगा। > मोनोपॉली: एक स्कूल की किताबें शहर की चुनिंदा 2 या 3 दुकानों पर ही मिलती हैं। > हर साल बदलाव: हर साल पब्लिशर बदल दिए जाते हैं। पुरानी किताबें किसी काम नहीं आ पाती। एक्सपर्ट व्यू - पाठ्यक्रम की एकरूपता को प्रशासन हस्तक्षेप करें “जिले में सीबीएसई संबद्ध निजी स्कूलों में सरकार द्वारा रजिस्टर्ड एनसीईआरटी की किताबों से ही पढ़ाई करवाई जा सकती है। इसके अलावा कोई भी पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाया जा सकता। यदि कोई स्कूल निजी पब्लिकेशन का उपयोग करता है, तो वह गलत है। इस संबंध में जांच की जाएगी।” -किशनसिंह, डीईओ प्रारंभिक बाड़मेर। “सरकार द्वारा जिले के सभी विद्यालयों में एक ही पाठ्यक्रम बच्चों को पढ़ाया जाए। इसके लिए सरकारी स्कूलों में निशुल्क वितरण के लिए और पाठ्यपुस्तक भंडार के डिपो पर एनसीईआरटी की पुस्तकों का वितरण किया जा रहा है।” -हुकमसिंह, मैनेजर, राजस्थान राज्य पाठ्य पुस्तक भंडार, बाड़मेर