बारां जिला प्रमुख की कुर्सी पर कोई पार्टी लगातार कब्जा बनाए नहीं रख पाई। भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवार बारी-बारी से इस पद पर काबिज रहे। पिछले 6 चुनावों का इतिहास देखें तो हर बार जिला परिषद का चेहरा बदला है। 1995 में भाजपा ने जिला प्रमुख की कुर्सी पर कब्जा जमाया। इसके बाद 2000 में कांग्रेस, 2005 में भाजपा और 2010 में फिर कांग्रेस के जिला प्रमुख बने। 2015 में फिर भाजपा के जिला प्रमुख बने। 2021 के चुनाव में वापस भाजपा ने 25 में से 13 सीटें जीतकर बहुमत हासिल करने के बावजूद जिला प्रमुख नहीं बना पाई। इस चुनाव में भाजपा के एक सदस्य की क्रॉस वोटिंग से कांग्रेस की उर्मिला जैन भाया ने भाजपा की प्रियंका शर्मा को हराकर खेल पलट दिया। इस बार मुकाबला दिलचस्प है। वार्डों की संख्या 25 से बढ़कर 29 हो गई है। अब जिला प्रमुख की कुर्सी तक पहुंचने के लिए किसी भी दल को कम से कम 15 सदस्यों का समर्थन जुटाना होगा। ऐसे में चुनाव में बहुमत का आंकड़ा पार करना ही पर्याप्त नहीं होगा। इसके अलावा तीसरे मोर्चे की सक्रियता भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। 2000 मंे कांग्रेस ने पलटा समीकरण, मारन को मिली सीट अगले चुनाव में कांग्रेस ने जिला परिषद की सत्ता अपने हाथ में ले ली। सन 2000 में भरत मारन जिला प्रमुख बने। इस समय प्रदेश में भी कांग्रेस की सरकार थी। इस तरह पांच साल बाद जिला परिषद में नेतृत्व बदल गया। 2005 मंे फिर भाजपा की वापसी, सारिका पहली महिला प्रमुख कांग्रेस का बोर्ड पांच साल बाद फिर बदल गया और भाजपा ने फिर जिला परिषद में वापसी करते हुए सारिका सिंह को जिला प्रमुख बनाया। उस समय प्रदेश में भाजपा की सरकार थी। इस चुनाव ने सत्ता बदलने के सिलसिले को आगे बढ़ाया। 2010 में कांग्रेस के रामचरण मीणा अगले चुनाव में जिला परिषद में एक बार फिर नेतृत्व बदल गया। 2010 में कांग्रेस समर्थित रामचरण मीणा जिला प्रमुख बने। लगातार बदलते परिणामों ने साफ कर दिया कि जिला परिषद की सत्ता पर किसी एक दल का स्थायी कब्जा नहीं रहा। 2015 में भाजपा ने बनाई जगह इस चुनाव में भाजपा ने जिला परिषद की सत्ता हासिल की और नंदलाल सुमन जिला प्रमुख बने। प्रदेश में भी भाजपा की सरकार थी। भाजपा की यह जीत पिछले चुनाव में कांग्रेस की बढ़त के बाद सत्ता में वापसी हुई थी। भाजपा बहुमत के बावजूद हारी गत चुनाव में भाजपा ने 25 में से 13 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया था। यही वह मौका था जब परिपाटी से ​हटकर लगातार दूसरी बार भाजपा का जिला प्रमुख बनने जा रहा था। लेकिन बहुमत के बावजूद मतदान में कांग्रेस की उर्मिला जैन भाया ने 13 वोट हासिल किए। जबकि भाजपा की प्रियंका शर्मा को 12 ही वोट मिले। 1995 में भाजपा के भरत बाठला बने थे बारां के पहले जिला प्रमुख बारां जिला बनने के बाद पहले चुनाव में छीपाबड़ौद से भाजपा नेता भरत लाल बाठला जिला प्रमुख बने। उस समय प्रदेश में भी भाजपा की सरकार थी। जिला परिषद की राजनीति में भाजपा ने अपनी शुरुआत मजबूत स्थिति के साथ की।