केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की आधी आबादी को सशक्त बनाने के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण का जो ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है, विपक्ष उसे पचा नहीं पा रहा है। उन्होंने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पर विपक्ष के व्यवहार को गलत बताया। उन्होंने पुराने किस्सों को याद दिलाते हुए कहा विपक्ष का यह व्यवहार नया नहीं है। मनमोहन सिंह की सरकार के समय जब यह बिल राज्यसभा में पारित हुआ था, तब कांग्रेस के ही सहयोगी दलों ने लोकसभा में बिल की कॉपियां फाड़ दी थीं। उनकी मंशा कभी महिला आरक्षण को पास कराने की थी ही नहीं। वे एक दिवसीय निजी दौरे पर सोमवार को झुंझुनूं पहुंचे। सर्किट हाउस में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आगामी परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों की संख्या वर्तमान 543 से बढ़कर लगभग 850 तक पहुंचने की संभावना है। इसी अनुपात में एससी (SC) और एसटी (ST) वर्ग की सीटें भी बढ़ेंगी और मातृशक्ति को भी उसी 33 प्रतिशत के अनुपात में व्यापक प्रतिनिधित्व मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष कभी मुस्लिम आरक्षण तो कभी उत्तर-दक्षिण भारत का मुद्दा उठाकर इस प्रक्रिया में केवल बाधा डालने का काम कर रहा है। ​विकास के मुद्दों पर केवल विरोध कर रहे ​डॉ. वीरेंद्र कुमार ने विपक्ष की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि चाहे राम मंदिर का मुद्दा हो, धारा 370 हटाना हो, एयर स्ट्राइक, सर्जिकल स्ट्राइक या फिर आयुष्मान भारत जैसी जनकल्याणकारी योजनाएं, विपक्ष ने हमेशा विरोध की राजनीति की है। ​उन्होंने कहा कि देश के विकास, समाज के उत्थान और मातृशक्ति को आगे बढ़ाने के लिए सभी को राजनीतिक पूर्वाग्रहों से ऊपर उठकर सकारात्मक ऊर्जा के साथ काम करना चाहिए। ​