भास्कर न्यूज | कंजौली केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन में टोडाभीम क्षेत्र में लापरवाही सामने आई है। करीब 4 करोड़ रुपए की लागत से स्वीकृत पेयजल योजना के बाद भी दो गांव पेयजल संकट झेल रहे हैं। योजना का लक्ष्य 2024 तक हर घर नल से जल देना था। 2026 में भी काम अधूरा है। यह योजना ऑरेज सहित चार गांवों के लिए स्वीकृत हुई थी। इसमें उच्च जलाशय टंकी का निर्माण, मुख्य पाइपलाइन, वितरण लाइन, हर घर तक नल कनेक्शन शामिल था। ऑरेज गांव में हालात ज्यादा गंभीर हैं। करीब 3000 की आबादी पानी संकट में है। लोग टैंकर, निजी स्रोतों पर निर्भर हैं। विभागीय रिकॉर्ड में योजना को पूर्ण बताया जा रहा है। जमीनी हकीकत उलट है। गांव में बनी पानी की टंकी का निर्माण अधूरा है। नलों पर टोटियां तक नहीं लगी हैं। इससे एक हजार से ज्यादा की आबादी पानी के लिए तरस रही है। ग्रामीण केशराम गुर्जर के मुताबिक साइट पर करीब एक साल से काम बंद पड़ा है। इसके बाद न कोई अधिकारी आया, न ठेकेदार ने काम पूरा किया। ग्रामीणों ने जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच राजस्थान संपर्क पोर्टल पर छह शिकायतें दर्ज कराईं। 9 फरवरी को बिजली कनेक्शन लंबित बताया गया। 22 अप्रैल को बजट नहीं होने का कारण दिया गया। 29 अप्रैल को फिर जांच का आश्वासन दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि किसी शिकायत पर मौके पर भौतिक सत्यापन नहीं हुआ। फोटो-वीडियो नहीं लगाए गए। ग्राम स्तर पर पुष्टि नहीं की गई। फिर भी सभी शिकायतें निस्तारित कर दी गईं। ग्रामीणों का कहना है कि एक ही योजना को कभी सुचारू बताया गया, कभी बजट के अभाव में लंबित। इससे विभागीय रिपोर्टों की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 4 करोड़ रुपए खर्च होने के बाद भी गांवों में पानी नहीं पहुंचा। उन्होंने दोषी अधिकारियों, ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग की है। चेतावनी दी है कि 15 दिन में जलापूर्ति बहाल नहीं हुई तो कलेक्ट्रेट करौली पर प्रदर्शन करेंगे। उच्च स्तरीय जांच की मांग करेंगे। पीएचईडी टोडाभीम की जेईएन मनीषा मीना ने कहा कि स्कीम का कार्य पूर्ण हो गया है। बजट की कमी से डिमांड नोटिस जमा नहीं हो पाया। बिजली कनेक्शन होते ही स्कीम चालू हो जाएगी।