मैरी कॉम, विजेंदर सिंह, अमित पंघल और निकहत जरीन ने अंतरराष्ट्रीय रिंग में भारत को पहचान दिलाई, लेकिन मौजूदा दौर में पदकों की निरंतरता बनाए रखना चुनौती बन रहा है। द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित बॉक्सिंग कोच सागरमल धायल के अनुसार, देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, बल्कि चयन प्रक्रिया, ट्रेनिंग और जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाओं में सुधार की जरूरत है। धायल का मानना है कि सरकार ने टारगेट ओलिंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स), खेलो इंडिया और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के माध्यम से खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं बढ़ाई हैं। विदेशी कोचिंग, डाइट और अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर मिल रहा है, लेकिन योजनाओं का लाभ निचले स्तर तक पहुंचाने के लिए बेहतर क्रियान्वयन जरूरी है। चयन में पारदर्शिता और घरेलू टूर्नामेंट जरूरी धायल के मुताबिक, राज्य और जिला स्तर की बॉक्सिंग फेडरेशन में चयन प्रक्रिया निष्पक्ष होनी चाहिए। पक्षपात, भाई-भतीजावाद और गुटबाजी के बजाय खिलाड़ी की योग्यता और मौजूदा प्रदर्शन को आधार बनाया जाए। राज्य और जिला स्तर पर सालभर में कम से कम चार से पांच बड़े टूर्नामेंट आयोजित हों, ताकि खिलाड़ियों को लगातार प्रतिस्पर्धा का अनुभव मिले। स्पोर्ट्स साइंस से जोड़ें ट्रेनिंग अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग में अब ताकत के साथ डेटा एनालिटिक्स, बायोमैकेनिक्स, वैज्ञानिक रिकवरी और न्यूट्रिशन की भी अहम भूमिका है। धायल के अनुसार, भारतीय खिलाड़ियों को आधुनिक ट्रेनिंग पद्धतियों से जोड़ना होगा। मानसिक मजबूती और समय पर अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर भी प्रदर्शन के लिए जरूरी हैं। 8 से 12 साल की उम्र में तलाशें प्रतिभाएं धायल ने सुझाव दिया कि स्कूल स्तर पर 8 से 12 साल के बच्चों की प्रतिभा पहचान कर उन्हें बॉक्सिंग अकादमियों से जोड़ा जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक रिंग, उपकरण और योग्य कोच उपलब्ध हों। आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों को मुफ्त डाइट, किट और स्कॉलरशिप मिले। साथ ही जूनियर प्रतियोगिताओं में उम्र संबंधी धोखाधड़ी रोकने के लिए सख्त नियम लागू किए जाएं।