भगवान विष्णु के अवतार भगवान नृसिंह के साथ मां महालक्ष्मी का ऐसा अनूठा स्वरूप कम ही देखने को मिलता है, जहां वे उनके वाम अंग में निर्भय मुद्रा में विराजमान हैं। अजमेर-पुष्कर क्षेत्र स्थित कपिल कुंड की इस प्राचीन तपोस्थली पर भगवान लक्ष्मी-नृसिंह के दर्शन के साथ भक्तों को धन, ऐश्वर्य और वैभव ही नहीं, अभय और भक्ति का आशीर्वाद भी मिलता है। मान्यता है कि यह स्थान सतयुग में कपिल मुनि की तपस्या का साक्षी रहा है। मंदिर परिसर में आज भी वह पीपल का वृक्ष और धूणा मौजूद है, जहां कपिल मुनि तप किया करते थे। मंदिर के पुजारी गोविंद पाराशर बताते हैं कि नाग पहाड़ प्राचीन काल से ही देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों की तपोस्थली रहा है। इनमें कपिल कुंड का विशेष महत्व है। मान्यता है कि ब्रह्माजी के यज्ञ के बाद देवी-देवताओं और ऋषियों ने नाग पहाड़ तथा पुष्कर क्षेत्र को अपनी तपोभूमि बनाया। भगवान कपिल मुनि ने गंगा सागर के साथ-साथ पुष्कर के इसी क्षेत्र में भी तपस्या की थी। तभी से यह स्थान कपिल कुंड के नाम से प्रसिद्ध हुआ। पुजारी के अनुसार, कपिल कुंड जितना प्राचीन है, उतना ही पुराना यहां लक्ष्मी-नृसिंह का स्थान माना जाता है। समय के साथ मंदिर का कई बार निर्माण और जीर्णोद्धार हुआ। प्राचीन प्रतिमाओं के स्थान पर नई प्रतिमाएं भी स्थापित की गईं। भगवान नृसिंह के साथ निर्भय मुद्रा में विराजमान मां महालक्ष्मी श्री लक्ष्मी-नृसिंह मंदिर में मां महालक्ष्मी की प्रतिमा भगवान नृसिंह के सिंहासन पर उनके वाम अंग में विराजित है। धार्मिक मान्यता है कि हिरण्यकश्यप के वध के बाद भी भगवान नृसिंह के उग्र स्वरूप के कारण देवी-देवता भी पास जाने का साहस नहीं कर पाए। केवल भक्त प्रह्लाद उनके समीप पहुंचे। बाद में मां महालक्ष्मी उनके वाम अंग में विराजित हुईं। प्रतिमा की दो भुजाएं हैं। एक हाथ से वे अभय का आशीर्वाद देती हैं और दूसरे में समृद्धि का प्रतीक कमल धारण किए हैं। यह स्वरूप शक्ति, समृद्धि और निर्भयता का प्रतीक माना जाता है। कपिल कुंड के जल से होती है भगवान की सेवा-पूजा | कपिल मुनि ने तपस्या के दौरान यहां कुंड का निर्माण करवाया था। कालांतर में इसे बावड़ी का स्वरूप दे दिया गया। इसके मध्य में एक गहरा कुआं भी है, मंदिर में प्रतिदिन भगवान लक्ष्मी-नृसिंह की सेवा-पूजा इसी कुंड के जल से की जाती है। अज्ञातवास में पांडवों ने भी किए थे दर्शन; पुजारी गोविंद पाराशर बताते हैं कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने पांडेश्वर महादेव व पंचकुंड क्षेत्र में निवास किया था। वे कपिल कुंड भी पहुंचे थे। यहां लक्ष्मी-नृसिंह की पूजा-अर्चना व तपस्या कर राजसुख का वरदान मांगा था। दीपावली पर विशेष पूजन, नवरात्र में होता है अखंड रामायण पाठ | दीपावली के अवसर पर मंदिर में मां महालक्ष्मी का विशेष पूजन किया जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। वहीं, प्रत्येक नवरात्र में मंदिर परिसर में अखंड श्रीरामचरित मानस का पाठ का आयोजन होता है।