डूंगरपुर जिले की 4,172 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं पिछले पांच महीने से मानदेय नहीं मिलने के कारण आर्थिक संकट से जूझ रही हैं। केंद्र सरकार के हिस्से का भुगतान लगातार लंबित है, जबकि राज्य सरकार के हिस्से का भी दो माह का मानदेय बकाया है। विभाग ने देरी की वजह नई ऑनलाइन व्यवस्था 'एमएमए स्पर्श पोर्टल' पर मैनुअल एंट्री और तकनीकी समस्याओं को बताया है। इसका असर उन हजारों महिलाओं पर पड़ा है, जो गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और बच्चों की देखभाल जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रही हैं। 2,140 केंद्रों पर सेवाएं, हजारों परिवार प्रभावित डूंगरपुर जिले में कुल 2,140 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें 2,091 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और 2,081 सहायिकाएं कार्यरत हैं। ये कर्मी गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और छह वर्ष तक के बच्चों की देखभाल के साथ-साथ पोषण, टीकाकरण और विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाती हैं। पांच माह से केंद्र का, दो माह से राज्य का भुगतान लंबित इन कर्मियों को पिछले पांच महीने से केंद्र सरकार के हिस्से का मानदेय नहीं मिला है। इसके अलावा राज्य सरकार का भी दो माह का भुगतान बकाया है। लगातार भुगतान नहीं होने से हजारों परिवारों के सामने रोजमर्रा के खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। कमजोर वर्ग की महिलाओं पर सबसे ज्यादा असर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में लगभग 80 प्रतिशत महिलाएं विधवा, तलाकशुदा या आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आती हैं। ऐसे में मानदेय में देरी उनके लिए गंभीर आर्थिक और मानसिक संकट का कारण बन गई है। भुगतान की मांग को लेकर कार्यकर्ता कई बार धरना-प्रदर्शन भी कर चुकी हैं, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकल पाया है। नई पोर्टल व्यवस्था बनी भुगतान में देरी की वजह विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस बार भुगतान में देरी की प्रमुख वजह नई ऑनलाइन प्रणाली 'एमएमए स्पर्श पोर्टल' है। पहले भुगतान संबंधी बिल राज पोषण पोर्टल से पे मैनेजर और एसएम पोर्टल के माध्यम से भेजे जाते थे, लेकिन अब मैनुअल एंट्री की व्यवस्था लागू की गई है। कई परियोजनाओं की मैपिंग अब तक पूरी नहीं हो सकी है और जहां मैपिंग पूरी हुई है, वहां भी तकनीकी दिक्कतों के कारण आवश्यक डेटा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इससे भुगतान प्रक्रिया प्रभावित हुई है। विभाग का कहना है कि तकनीकी समस्याओं को दूर करने का काम जारी है और प्रक्रिया पूरी होते ही लंबित मानदेय जारी कर दिया जाएगा। तकनीक का लाभ तभी, जब भुगतान समय पर पहुंचे डिजिटल व्यवस्था और पारदर्शिता के लिए पोर्टल बदलना सकारात्मक कदम हो सकता है, लेकिन पर्याप्त तैयारी के अभाव का असर सीधे उन महिलाओं पर पड़ा है जो सरकारी योजनाओं की जमीनी रीढ़ हैं। जब तक तकनीकी कमियों को दूर कर भुगतान प्रक्रिया सुचारु नहीं की जाती, तब तक हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को आर्थिक राहत मिलना मुश्किल रहेगा। प्रशासन के सामने अब चुनौती यह है कि तकनीकी सुधार के साथ-साथ इन कर्मियों के लिए शीघ्र भुगतान का प्रभावी समाधान भी सुनिश्चित करे।