डूंगरपुर में आशा सहयोगिनी एवं साथिन यूनियन (सीटू) ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 'काला दिवस' मनाया। यूनियन के सदस्यों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया और जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर मांगों को पूरा करने की अपील की। राजस्थान आशा सहयोगिनी एवं साथिन यूनियन (सीटू) के आह्वान पर डूंगरपुर जिले में भी आशा सहयोगिनियों और साथिनों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया। उन्होंने राज्य सरकार के इस वर्ष के बजट पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। '4 महीनों तक नहीं मिलता मानदेय' आशा सहयोगिनियों ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने उन पर काम का भारी बोझ डाल दिया है, लेकिन पीसीटीएस का पैसा और मानदेय समय पर नहीं मिलता। महंगाई के इस दौर में उन्हें 3-4 महीनों तक भुगतान का इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने यह भी बताया कि ऑनलाइन काम की अनिवार्यता तो कर दी गई है, लेकिन विभाग द्वारा अब तक एंड्रॉइड मोबाइल उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इससे उन्हें काम करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आशा सहयोगिनियों की मुख्य मांगों में सभी को स्थायी कर राज्य कर्मचारी घोषित करना शामिल है। जब तक स्थायीकरण नहीं होता, तब तक उन्होंने न्यूनतम वेतन 26000 रुपये प्रति माह दिए जाने की मांग की है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनके ज्ञापन पर जल्द ध्यान नहीं दिया, तो राजस्थान की समस्त आशाएं उग्र आंदोलन और संघर्ष का रास्ता अपनाने पर मजबूर होंगी।