डूंगरपुर जिले के 77 हजार से अधिक किसानों को पिछले 2साल से खरीफ फसल खराबे के मुआवजे का इंतजार है। तकनीकी और प्रशासनिक सुस्ती के कारण 23 करोड़ 59 लाख रुपए से ज्यादा का कृषि आदान-अनुदान बकाया है, जिससे किसान आर्थिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं। यह स्थिति वर्ष 2024 और 2025 में बाढ़ और अतिवृष्टि के कारण खरीफ की फसलों को हुए भारी नुकसान के बाद उत्पन्न हुई है। प्रशासन ने फसल खराबे का सर्वे कराया था। सर्वे में खराब पाई गई थी फसल वर्ष 2024 के सर्वे में सीमलवाड़ा और चिखली तहसील क्षेत्रों के 5,695 किसानों की 33 से 75 प्रतिशत तक फसल खराब पाई गई थी। इसी प्रकार वर्ष 2025 में डूंगरपुर जिले की 13 तहसीलों में 71,539 किसानों की 33 से 100 प्रतिशत तक फसल खराबी दर्ज की गई। खराबे की रिपोर्ट, मुआवजे के बिल सरकार को भेजे गए दोनों वर्षों के खराबे की रिपोर्ट और मुआवजे के बिल राज्य सरकार को भेजे गए हैं। इसमें वर्ष 2024 के लिए 5,695 किसानों के लिए 2 करोड़ 31 लाख रुपए और वर्ष 2025 के लिए 71,539 प्रभावित किसानों के लिए 21 करोड़ 28 लाख रुपए का मुआवजा शामिल है। हालांकि, किसानों को अभी तक यह राशि प्राप्त नहीं हुई है। किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ा भारतीय किसान संघ के जिला प्रवक्ता लल्लूराम बिजोला ने बताया कि किसानों की फसल बर्बाद होने से कर्ज का बोझ बढ़ गया है। सरकार से उम्मीद थी कि समय पर मदद मिलेगी, लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी पोर्टल और फाइलों में ही मुआवजा अटका हुआ है। कई बार जिला प्रशासन व स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मुआवजे की मांग को लेकर गुहार लगाई गई, लेकिन अभी तक किसानों की सुनवाई नहीं हो रही है। जिला प्रशासन ने सभी बिल तैयार करके सरकार को भिजवाए वही कलेक्टर देशलदान ने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से सभी बिल तैयार करके राज्य सरकार को भिजवा दिए गए है। लेकिन जयपुर से इसीएस नहीं होने से किसानों के मुआवजे का भुगतान नहीं हुआ है। हालाकि जिला कलेक्टर ने जल्द ही किसानों के खातों में मुआवजा राशी आने का आश्वासन दिया है।