कोटा में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने शनिवार को भामाशाह मंडी के तौल केंद्र का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मंडी में गेहूं खरीद की सुस्त रफ्तार और संसाधनों की कमी पर नाराजगी जताई। तौल, सैंपलिंग और उठाव की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार के निर्देश दिए। मंत्री नागर ने एफसीआई के जीएम राजेश चौधरी से भी फोन पर बात की। निरीक्षण के दौरान ऊर्जा मंत्री के साथ भारतीय खाद्य निगम और राजफैड के अधिकारी, अतिरिक्त कलेक्टर सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। ​निरीक्षण के दौरान मंडी में तौल की गति धीमी होने पर उन्होंने एफसीआई अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि भामाशाह मंडी जैसी बड़ी मंडी में जहां रोज डेढ़ लाख क्विंटल तक की क्षमता है, वहां क्षमता के अनुसार काम नहीं हो रहा है। उन्होंने आश्चर्य जताते हुए कहा कि यह पहली बार देखने में आ रहा है कि इतनी बड़ी मंडी सीजन के दौरान खाली पड़ी है। मंडी में रोज 80 हजार कट्टों की तुलाई होनी चाहिए। जबकि वर्तमान में केवल 40 हजार कट्टों की ही तुलाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि संसाधनों का सही प्रबंधन हो तो यह संख्या एक लाख तक पहुंच सकती है। ऊर्जा मंत्री ने बायोमेट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दिया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को बायोमेट्रिक मशीनों की संख्या वर्तमान में 3 से बढ़ाकर 6 करने को कहा ताकि किसानों का सत्यापन कार्य स्पीड से हो सकें। उन्होंने मैनपावर बढ़ाने के भी निर्देश दिए। मंत्री ने गौर किया कि तौल केंद्र पर एक ही व्यक्ति को बायोमेट्रिक, सैंपलिंग और अन्य कार्यों की जिम्मेदारी दी गई है। जिससे कार्य का बोझ बढ़ रहा है और प्रक्रिया में देरी हो रही है। उन्होंने कार्यों के विकेंद्रीकरण और अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति के आदेश दिए। मंडी में गेहूं के उठाव की समस्या को लेकर मंत्री नागर ने एफसीआई के महाप्रबंधक राजेश चौधरी से फोन पर बात की। कहा कि सैंपल क्वालिटी चेक करने और माल के उठाव में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसानों को उनकी उपज का तौल समय पर हो और भुगतान में भी कोई देरी न आए। ऊर्जा मंत्री ने तौल केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों को किसानों के साथ संवेदनशीलता और विनम्रता से व्यवहार करने की सीख दी। उन्होंने कहा कि किसान अन्नदाता है और उसे मंडी में किसी भी प्रकार की मानसिक या शारीरिक परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को नियमित रूप से मंडी का मॉनिटरिंग करने और प्रतिदिन की प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए ताकि खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाया जा सके।