भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा आखिरकार झालावाड़-कोटा के रास्ते मानसून ने प्रदेश में दस्तक दे दी है। प्रदेश में पिछले 24 घंटे की सर्वाधिक बारिश जहाजपुर में 105 मिमी हुई। फूलियाकलां में 72 मिमी और बिजौलिया 71 मिमी बारिश हुई। पिछले 11 वर्षों के जिला वर्षा रिकॉर्ड बताता हैं कि जब-जब मानसून ने हाड़ौती के रास्ते प्रदेश में कदम रखा, तब भीलवाड़ा को सामान्य से बेहतर बारिश मिली। इसके उलट, बांसवाड़ा-डूंगरपुर (वागड़) रूट से एंट्री पर अधिकांश वर्षों में जिले में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई। सबसे बड़ा उदाहरण 2016 और 2019 हैं। 2016 में मानसून झालावाड़ के रास्ते आया और जिले में 904 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य (651.4 मिमी) से करीब 39 प्रतिशत अधिक थी। 2019 में भी यही रास्ता रहा और जिले में 995.8 मिमी वर्षा दर्ज हुई, जो सामान्य से 53 प्रतिशत अधिक रही। पिछले वर्ष 2025 में भी मानसून हाड़ौती के रास्ते आया और जिले में 945.4 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब 45 प्रतिशत अधिक थी। यानी चार में तीन बार इसी रास्ते ने जिले को भरपूर बारिश दी। इसके विपरीत, बांसवाड़ा- डूंगरपुर के रास्ते आए मानसून का रिकॉर्ड उतना उत्साहजनक नहीं रहा। 2015, 2017, 2018, 2020, 2021, 2023 और 2024—इन सातों वर्षों में जिले की कुल बारिश सामान्य औसत से कम रही। सबसे कमजोर वर्ष 2023 रहा, जब पूरे जिले में केवल 482 मिमी बारिश दर्ज हुई। 2024 में भी वर्षा 486 मिमी पर सिमट गई। गुलाबपुरा कस्बे में गुरुवार को पिछले 24 घंटे में 8 बजे तक 39 एमएम बारिश हुई। सरेरी में 32.50 एमएम आगूंचा में 41.50 एमएम बारिश हुई है। बड़लियास और आसपास के ग्रामीण इलाकों में करीब पांच घंटे तक बारिश हुई। हनुमान नगर के गाडोली गांव में देर रात आकाशीय बिजली गिरने से सूरजमल के बाड़े में गाय एवं भैंस की मौत हो गई। सूचना मिलने पर मौके पर हनुमान नगर पुलिस व पशु चिकित्सक मौके पर पहुंचे। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका कारण मानसूनी ट्रफ और कम दबाव के क्षेत्रों का मार्ग है। जब मानसून झालावाड़-कोटा बेल्ट से प्रवेश करता है, तब बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी सीधे कोटा, चित्तौड़गढ़ और भीलवाड़ा क्षेत्र तक पहुंचती है। इससे लगातार वर्षा वाले सिस्टम बनते हैं। जबकि वागड़ रूट से आने वाले कई सिस्टम अरावली के समानांतर आगे निकल जाते हैं, जिससे भीलवाड़ा में नमी कम पहुंचती है और बारिश का वितरण कमजोर हो जाता है। मौसम विभाग ने 5 जुलाई तक पूर्वी राजस्थान में बारिश की गतिविधियां तेज होने तथा कोटा-उदयपुर संभाग में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना जताई है। यदि यही सिस्टम लगातार सक्रिय रहे तो भीलवाड़ा में भी जुलाई के पहले 10-15 दिन अच्छी बारिश दर्ज हो सकती है। बनेड़ा। बारिश के बाद पहाड़ी पर आए बादल अगले 5 से 7 दिन जारी रहेगा बारिश का दौर बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी हिस्से और उससे सटे ओडिशा- पश्चिम बंगाल तटों पर एक कम दबाव का क्षेत्र बन गया है। इसके साथ ही एक चक्रवाती हवाओं का परिक्रमण भी समुद्र तल से 7.6 किलोमीटर ऊपर तक सक्रिय है। एक और चक्रवाती तंत्र मध्य पाकिस्तान और उससे सटे उत्तर-पश्चिमी राजस्थान के ऊपर बना हुआ है। इससे मानसून की ट्रफ लाइन उत्तर- पश्चिमी राजस्थान से होकर बंगाल की खाड़ी तक जा रही है, जो मानसून को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद कर रही है। भीलवाड़ा सहित आस-पास के जिलों और संभाग में 5 से 7 दिनों तक मानसून सक्रिय रहेगा। मध्यम से भारी बारिश हो सकती है, जबकि दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में भारी वर्षा होने की संभावना है। पूर्वानुमान के अनुसार 3 से 16 जुलाई के दौरान सामान्य से अधिक वर्षा के संकेत हैं।