इटावा में जैन समाज ने पर्युषण पर्व का पांचवां दिन उत्तम सत्य धर्म के रूप में मनाया। इस अवसर पर मथुरा से आए विद्वान अनिल जैन शास्त्री ने प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि सत्य सिर्फ सच बोलना नहीं, बल्कि मन, वचन और शरीर की शुद्धि भी जरूरी है। शास्त्री ने बताया किश्रेष्ठ सत्य का आचरण करना, झूठ और कपट का त्याग करना तथा अपनी आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानना ही उत्तम सत्य है। उन्होंने जोर दिया कि सत्य धर्म केवल सच बोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन में सदाचार, करुणा और न्याय के मार्ग पर चलने का नाम है। उन्होंने कहा कि सत्य का पालन केवल वाणी से नहीं होता। इसके लिए मन, वचन और शरीर तीनों की शुद्धि जरूरी है। यदि मन में छल या द्वेष है, तो केवल शब्दों का सच बोलना भी वास्तविक सत्य नहीं कहलाता। झूठ, कपट, धोखा और दिखावे से दूर रहना ही उत्तम सत्य है। जो वचन किसी को परेशानी न दें और सबका हित करने वाले हों, वही वास्तविक सत्य भाषा है। सत्य केवल वाणी से नहीं, बल्कि हमारे विचारों और व्यवहार में भी दिखना चाहिए। शास्त्री ने जीवन के चार मूल सत्य भी बताए। पहला, जिसने जन्म लिया है, उसकी मृत्यु निश्चित है। दूसरा, जीव अकेला आता है और अकेला ही जाता है, साथ कुछ नहीं ले जाता। तीसरा, जैसा कर्म करोगे, वैसा ही फल भोगना पड़ेगा। चौथा, मेरा वास्तविक स्वरूप केवल मैं (आत्मा) हूं, बाकी सब बाहरी संयोग हैं। इस दौरान मंदिर में कई धार्मिक कार्यक्रम भी हुए। सुबह 7 बजे भगवान का अभिषेक और शांतिधारा की गई। इसके बाद दसलक्षण पर्व की पूजा-अर्चना हुई। शाम को बच्चों की पाठशाला, भगवान की महाआरती और रात में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसमें प्रश्न मंच प्रतियोगिता भी हुई। इस अवसर पर समाज के अध्यक्ष नवनीत जैन, महामंत्री मनोज जैन, उपाध्यक्ष देवेंद्र जैन, कोषाध्यक्ष पीयूष जैन, सांस्कृतिक मंत्री ऋषभ जैन, संरक्षक चेतन पाटनी, बाहुबली जैन, अरुण जैन, पारस जैन, मुन्नालाल पाटोदी, मदनमोहन जैन, डीके जैन, मूलचंद जैन, हरिप्रकाश जैन, देवेंद्र जैन, अमोलक जैन, रिंकू जैन सीनोता, जितेंद्र जैन और अमित जैन सहित समाज के बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।