रात के अंधेरे में बायोमेट्रिक सिस्टम को चकमा देकर फर्जी आधार कार्ड बनाने का नेटवर्क सामने आया है। एटीएस जांच में खुलासा हुआ है कि हनुमानगढ़ के भादरा से संचालित गिरोह पिछले एक साल से देश के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले आधार डेटाबेस में सेंध लगा रहा था। यह नेटवर्क जयपुर से संचालित एक गिरोह से भी जुड़ा मिला है। तार दिल्ली से लेकर श्रीनगर तक फैले हैं। दिल्ली के संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के पतों पर दबिश दी गई, लेकिन कोई नहीं मिला। टेरर फंडिंग से भी कनेक्शन; संवेदनशील इलाकों के नाम-पते पर छापे एटीएस को 150 फर्जी रबर थंब (सिलिकॉन क्लोन), 12 लैपटॉप और 500 से ज्यादा सिम कार्ड मिले हैं। अब जांच का फोकस फर्जीवाड़े के साथ आतंकी नेटवर्क और टेरर फंडिंग पर भी है। एजेंसियां हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, जयपुर, दिल्ली और बीकानेर में एकसाथ जांच कर रही हैं। नाम-पते प्रदेश के, फोटो बाहरी लोगों के फर्जी आधार से सिम-बैंक खाते खोले जयपुर व आसपास इलाकों में किराए के मकान दिखाए। एक आधार पर दर्जनों प्री-एक्टिवेटेड सिम लेकर कश्मीर में बैठे हैंडलर्स से संपर्क के लिए इस्तेमाल की। दस्तावेजों से बैंक खाते खोलकर खाड़ी देशों से आने वाले संदिग्ध पैसे ट्रांसफर किए गए। टेरर फंडिंग का एंगल भी सामने आया है। “हमने हनुमानगढ़ के भादरा से जिस गिरोह को पकड़ा है, उनके तार सीमा पार और कश्मीर के संदिग्धों से जुड़े होने की आशंका है।” -दिनेश एम.एन., एडीजी, एटीएस एवं एसओजी (राज.)