रिटायरमेंट के बाद जिस में उम्र लोग आराम करते हैं, किसान खेत में मेहनत कर रहा है। उम्र 64 साल है, लेकिन काम करने की आदत अब भी वैसी ही है। ससुराल में बगीचे से कमाई का तरीका समझ आने पर परंपरागत खेती को छोड़कर अमरूद की बागवानी शुरू की। फल बेचने के लिए उन्हें बाजार भी नहीं जाना पड़ता, खरीदार खुद खेत पर पहुंच जाते हैं। तीन साल में कमाई 4 लाख रुपए सालाना पहुंच गई है। इस बार खेत पर ही हर रोज 70 से 80 किलो अमरूद बिक्री हो रही है। किसान को उम्मीद है कि इस बार 6 लाख से ज्यादा इनकम होगी। म्हारे देस की खेती में इस बार बात अजमेर के किसान की … आराम करने के बजाय खेती से कमाई का पैटर्न बदला केकड़ी में गोबला गांव के किसान रामस्वरूप जाट (64) 8वीं तक पढ़े हैं। उनके पास 30 बीघा जमीन है। बड़ा बेटा नरेंद्र (37) बैंक में मैनेजर है, जबकि छोटा बेटा प्रकाश (34) कोल इंडिया में इंजीनियर है। रामस्वरूप बताते हैं-खेती के साथ डेयरी से की कमाई से ही बेटों को पढ़ाया है। अब दोनों नौकरी के कारण बाहर ही रहते हैं। इस उम्र में पहले जितनी मेहनत तो नहीं होती, लेकिन घर पर बैठकर आराम करने के बजाय बागवानी शुरू की। इसमें मेहनत भी कम होती है, सारा दिन खेत में सार-संभाल में निकल जाता है। कमाई भी पहले से ज्यादा हो गई है। इनकम बढ़ाने के लिए खेती के साथ किया पशुपालन रामस्वरूप बताते हैं- बारिश के सीजन में होने वाली फसलों पर निर्भरता रहती थी। 30 बीघा जमीन अलग-अलग जगह पर है। 10 बीघा जमीन जहां कुआं है और पानी भी अच्छा है। गेहूं के साथ अन्य फसलें की जाती थी। फसलों की बुवाई से लेकर उसे बेचने तक बहुत मेहनत लगती थी, लेकिन इनकम नहीं बढ़ रही थी। साल 1990 में डेयरी शुरू की। 10 भैंस और 2 गाय से शुरुआत की। रोजाना का करीब 50 लीटर तक दूध बिक जाता है। महीने के 40 हजार रुपए तक बचत होती थी। डेयरी का काम अच्छा है, लेकिन प्रोपर मेहनत नहीं कर पाने की के कारण 2007 में डेयरी को बंद कर दिया। ससुराल में बगीचा देखकर शुरू की बागवानी रामस्वरूप बताते हैं- साल 2018 में मैंने अपने ससुराल में 3 बीघा जमीन पर अमरूद का बगीचा लगवाया था। दो साल बाद जब फल आने लगे तो बगीचे को सालाना 6 लाख रुपए के ठेके पर दे दिया। वहां अमरूद की अच्छी पैदावार देखकर मेरे बेटों ने भी अपने खेत में बगीचा लगाने की सलाह दी। इसके बाद अगस्त 2020 में टोंक के देवड़ावास में सरकारी नर्सरी से 50 रुपए प्रति पौधे से हिसाब से अमरूद की चार वैरायटी के 600 पौधे खरीदे। इसमें हिसार सफेदा, लखनऊ 49, बर्फखान, इलाहबाद सफेदा वैरायटी शामिल है। वे बताते हैं - 10 बीघा में गढ्डे खोदकर गोबर और मिट्टी के साथ पौधे लगाए। पौधों की दूसरी 16 फीट रखी, ताकि पौधों को बढ़ने के लिए जगह मिल सके। शुरुआत में 200 पौधे खराब हो गए रामस्वरूप बताते हैं- शुरुआत में पौधों को पानी देने के लिए ड्रिप सिस्टम लगाया था। काली मिट्टी होने के कारण पानी नहीं रिसता था। ऐसे में ज्यादा नमी के कारण ही करीब 200 पौधे खराब हो गए। इससे नुकसान हुआ, लेकिन मैंने बगीचे की देखभाल जारी रखी। इसके बाद मैंने ड्रिप सिस्टम हटा दिया। अब पौधों को जरूरत के हिसाब से खुद पानी देता हूं। पौधे लगाने के करीब दो साल बाद फल आने शुरू हो गए। साल 2023 में पहली बार अमरूद बेचकर करीब 70 हजार रुपए मिले। अगले साल करीब डेढ़ लाख रुपए की कमाई हुई। साल 2025 में अमरूद बेचकर करीब 4 लाख रुपए की कमाई हुई। अब हर साल उत्पादन बढ़ रहा है। सरकारी योजना में लगाया सोलर सिस्टम रामस्वरूप बताते हैं-बिजली की समस्या से बचने के लिए सरकारी योजना के तहत 7 एचपी का सोलर सिस्टम भी लगवाया। इसके लिए 1.30 लाख रुपए जमा करवाए। इससे सिंचाई करने में सुविधा होने लगी। स्वाद और क्वालिटी अच्छी, खेत पर पहुंच जाते हैं खरीदार अमरूद का एक पौधा करीब 25 साल तक फल दे सकता है। शुरुआत में पौधों की देखभाल पर ज्यादा ध्यान देना पड़ता है, लेकिन पौधे बड़े होने और बगीचा तैयार होने के बाद शुरुआती समय के मुकाबले मेहनत कम हो जाती है। अब उनके बगीचे में लगातार उत्पादन बढ़ रहा है। रामस्वरूप बताते हैं - अमरूद का स्वाद और क्वालिटी अच्छी है। इसलिए मुझे अमरूद बेचने के लिए बाजार नहीं जाना पड़ता। खरीददार खुद खेत पर आ जाते हैं। इस बार 60 रुपए प्रति किलो का भाव मिल रहा है। इससे बाजार तक माल ले जाने का खर्च और परेशानी भी नहीं होती। इस बार अक्टूबर में ही शुरू हुई फ्रूटिंग रामस्वरूप बताते हैं - आमतौर पर अमरूद में नवंबर से फल आने शुरू होते हैं, लेकिन इस बार अक्टूबर में ही फ्रूटिंग शुरू हो गई। अभी हर दिन खेत से ही 4 से 5 हजार रुपए के अमरूद बिक रहे हैं। इससे रोज की बिक्री अच्छी हो रही है। वे बताते हैं - अमरूद के जो करीब 200 पौधे खराब हुए थे, उनकी जगह मैंने अनार के पौधे लगा दिए। इस बार अनार के पौधों पर भी अच्छे फल आए हैं। इससे उम्मीद है कि आगे अमरूद के साथ अनार से भी आमदनी होगी। --- खेती किसानी से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए…. ड्राइवर का खेती में अनोखा प्रयाेग,खाद खरीदने की जरूरत नहीं:बाजरा का उत्पादन बढ़ा, अब अमरूद और गन्ना से भी अच्छी कमाई की उम्मीद रासायनिक खाद से खेती में होने वाले खर्च को कम करने के लिए जैविक खेती शुरू की। वर्मी कंपोस्ट की जगह बायोगैस स्लरी (वेस्ट) का इस्तेमाल किया। पूरी खबर पढ़िए