भास्कर न्यूज | जमीतपुरा नोताड़ा फीडर क्षेत्र में कई दिनों से बाधित बिजली आपूर्ति से नाराज ग्रामीणों और किसानों ने सोमवार को डिस्कॉम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। ग्रामीण सुबह 11 बजे जमीतपुरा डिस्कॉम कार्यालय पहुंचे और तालेड़ा एईएन कार्यालय के गेट पर ताला लगाकर करीब तीन घंटे धरना-प्रदर्शन किया। ग्रामीण बिजली समस्या के स्थाई समाधान की मांग पर अड़े रहे। प्रदर्शन की सूचना पर तहसीलदार बनवारीलाल, नायब तहसीलदार हर्षित कुमार और डिस्कॉम के सहायक अभियंता ललित गुप्ता पहुंचे। ग्रामीणों से वार्ता कर छह दिन के भीतर समाधान कराने का आश्वासन दिया, जिसके बाद धरना समाप्त हुआ। ग्रामीणों ने बताया कि नोताड़ा फीडर में तकनीकी खराबी और अधिक लोड के कारण बिजली आपूर्ति प्रभावित है। सिंगल फेज और थ्री फेज सप्लाई नियमित नहीं मिलने से इस सीजन सिंचाई कार्य प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों ने देलूंदा गांव को मेहराणा जीएसएस से जोड़ने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि नोताड़ा, भोपत, देलूंदा और हीरापुर क्षेत्र में थ्री फेज बिजली नहीं मिलने से किसानों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। प्रदर्शनकारियों में बाबूलाल कुशवाहा, रणजीत सिंह, गुरप्रीत सिंह, सलाम मोहम्मद, ओम गोस्वामी, गनी मोहम्मद, मनजिंदर सिंह, हंसराज कुशवाहा, रामस्वरूप, परमानंद, दयाराम, चेतन शर्मा शामिल रहे। ^फीडर पर अधिक लोड और तकनीकी दिक्कत के कारण बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है। नए जीएसएस से जुड़े कार्य में आ रही समस्या जल्द दूर कर दी जाएगी। -बनवारीलाल, तहसीलदार ^ग्रामीणों से वार्ता कर छह दिन में समस्या का समाधान कराने का आश्वासन दिया गया है। देलूंदा को मेहराणा जीएसएस से जोड़ने की मांग पर विचार कर रहे। -हर्षितकुमार, नायब तहसीलदार ^विभाग किसानों की समस्या के समाधान के लिए काम कर रहा है। एक सप्ताह के भीतर पर्याप्त सप्लाई दिलाने और नोताड़ा फीडर की समस्या का स्थाई समाधान करने का प्रयास किया जाएगा। -ललित गुप्ता, एईएन नोताड़ा फीडर क्षेत्र में बिजली संकट कोई नई समस्या नहीं है। बरसात और कृषि सीजन शुरू होते ही सिंचाई का लोड बढ़ने से फीडर पर दबाव बढ़ जाता है। पर्याप्त क्षमता और वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने से बार-बार तकनीकी खराबियां आती हैं। कई गांवों में नियमित थ्री फेज बिजली नहीं मिलने से खेती पर असर पड़ता है। ग्रामीण लंबे समय से देलूंदा को मेहराणा जीएसएस से जोड़ने और फीडर का भार कम करने की मांग कर रहे हैं। यदि स्थाई समाधान नहीं हुआ तो हर कृषि सीजन में यही स्थिति दोहराने की आशंका बनी रहेगी।