उर्वरक वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने व कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए कृषि विभाग ने अनुदानित खाद वितरण व्यवस्था में बदलाव किया है। अब किसानों को अनुदानित उर्वरक (सब्सिडी वाली खाद) फार्मर रजिस्ट्री आईडी के आधार पर ही दिया जाएगा। ये व्यवस्था कई जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत लागू हो गई है। जिले में अगले दो माह में लागू हो सकती है। इस संबंध में कृषि आयुक्त ने निर्देश भी जारी किए हैं, जिनके अनुसार यूरिया, डीएपी, एनपीके, एसएसपी व एमओपी सहित सभी अनुदानित उर्वरकों का विक्रय किसान की फार्मर रजिस्ट्री आईडी या फार्मर आईडी पंजीकरण रसीद के आधार पर ही किया जा सकेगा। केंद्र सरकार किसानों को उर्वरकों पर सब्सिडी उपलब्ध कराती है। ऐसे में अनुदानित उर्वरकों के दुरुपयोग और जमाखोरी को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। यूरिया-डीएपी के साथ अन्य उत्पाद नहीं थोप सकेंगे डीलर्स : आदेशों में आयुक्तालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार के अनुदानित उर्वरक की बिक्री अन्य गैर-अनुदानित उर्वरकों या कृषि आदानों के साथ अनिवार्य रूप से जोड़कर या टैगिंग करके नहीं की जा सकेगी। यानी डीलर अब बिना किसान की मर्जी के यूरिया-डीएपी के साथ अन्य उत्पाद नहीं दे सकेंगे। अक्सर शिकायतें आती हैं कि डीलर्स यूरिया के साथ जबरन अन्य उत्पाद थोप देते हैं। अब ऐसा पाए जाने पर संबंधित उर्वरक विक्रेता व आपूर्तिकर्ता के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।