देवस्थान विभाग की ऐतिहासिक फतह मेमोरियल बिल्डिंग इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। एक ओर इस बेशकीमती संपत्ति को हेरिटेज होटल में तब्दील करने की बड़ी योजनाएं बन रही हैं। दूसरी ओर विभाग की लापरवाही ने इसे डंपिंग यार्ड में बदल दिया है। होटल के लिए कमरे खाली कराने के नाम पर विभाग के कर्मचारियों ने भीतर रखा तमाम सामान- बेड, गद्दे, टेबल और कुर्सियां परिसर में ही लावारिस फेंक दिया है। खुले में बिखरा यह सामान अब कचरे के ढेर जैसा नजर आ रहा है, जो न केवल अव्यवस्था की कहानी कह रहा है, बल्कि शहर की पर्यटन छवि को भी गहरा नुकसान पहुंचा रहा है। विडंबना यह है कि इसी भवन के एक हिस्से में पर्यटन विभाग का कार्यालय और स्वागत केंद्र संचालित है, जहाँ दिनभर पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों और मेहमानों की आवाजाही रहती है। मुख्य द्वार पर फैला यह कबाड़ विभाग की संवेदनहीनता को उजागर कर रहा है। इस 50 कमरों वाली बिल्डिंग को 15 साल के लिए लीज पर दिया गया है, जिससे विभाग को सालाना करीब 43 लाख रुपए का राजस्व मिलेगा। फरवरी में ही कब्जा सौंपने के बावजूद परिसर को व्यवस्थित करने के बजाय उसे बदरंग छोड़ दिया गया है। मामले पर देवस्थान विभाग के सहायक आयुक्त जतिन गांधी का कहना है कि बाहर रखा सामान विभाग का है, जिसमें से उपयोगी वस्तुओं का पुनः इस्तेमाल होगा और शेष की नीलामी की जाएगी। इसके लिए एक कर्मचारी को निगरानी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।