तकनीकी खामियों के चलते केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 4 महीने पहले ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) पर ‘ए’ और ‘सी’ श्रेणी के वाहनों की फिटनेस पर रोक लगा दी थी। साथ ही इन वाहनों की फिटनेस जांच के लिए आरटीओ-डीटीओ कार्यालयों में व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए, लेकिन प्रदेश में अब तक इन आदेशों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पाया है। स्थिति यह है कि एटीएस संचालकों ने इन श्रेणी के वाहनों का परीक्षण पूरी तरह बंद कर दिया है, जबकि परिवहन मुख्यालय ने आरटीओ-डीटीओ स्तर पर फिटनेस जांच शुरू करने के स्पष्ट आदेश जारी नहीं किए। इसके चलते प्रदेशभर के करीब 70 हजार से अधिक वाहन मालिक फिटनेस प्रमाण-पत्र के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। ये एटीएस और ऑफिसों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन फिटनेस नहीं हो रही है। मंत्रालय की समीक्षा में सामने आया कि कृषि और निर्माण श्रेणी के वाहनों के परीक्षण में एटीएस प्रणाली पूरी तरह सक्षम नहीं है। ट्रैक्टर, पावर टिलर, हार्वेस्टर जैसे कृषि वाहनों और एक्सकेवेटर, रोलर, क्रेन, फोर्कलिफ्ट जैसे निर्माण उपकरणों के परीक्षण में तकनीकी खामियां पाई गई हैं। साथ ही एआईएस-128 में भी इन श्रेणियों के परीक्षण की स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित नहीं है। ऐसे में मंत्रालय ने श्रेणी ‘ए’ (कृषि वाहन) और श्रेणी ‘सी’ (निर्माण उपकरण) के वाहनों की फिटनेस जांच और प्रमाण-पत्र जारी करने का अधिकार दोबारा आरटीओ को सौंप दिया, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक व्यवस्था लागू नहीं हो पाई है। उल्लेखनीय है कि मंत्रालय ने 24 नवंबर 2024 को आदेश जारी करके इन वाहनों की ऑफिस में फिटनेस करने के आदेश जारी किए थे। इससे पहले इन वाहनों की फिटनेस जांच नॉन-एटीएस केंद्रों पर होती थी।