जनूथर डीग के गारौली गांव में ग्रामीणों को गंभीर पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। चंबल पेयजल परियोजना और जलजीवन मिशन योजना का लाभ गांव के लोगों को नहीं मिल पा रहा है। लाखों रुपए खर्च कर बनाई गई आकाशीय टंकी भी शोपीस बनी हुई है, जिससे ग्रामीण प्यासे रहने को मजबूर हैं। दांतलौठी ग्राम पंचायत के निकटवर्ती गारौली गांव में जलजीवन मिशन के तहत लाखों रुपए की लागत से एक आकाशीय टंकी का निर्माण महीनों पहले कराया गया था। यह टंकी अभी तक चालू नहीं हो पाई है, जिसके कारण ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल नहीं मिल पा रहा है। गांव की 2011 की जनगणना के अनुसार जनसंख्या लगभग 2100 है। यहां का भूमिगत जल काफी गहरा और खारा है, जो पीने योग्य नहीं है। वर्षों पहले लगाया गया आरओ प्लांट भी पानी में आर्सेनिक और फ्लोराइड जैसे हानिकारक तत्वों की अधिकता के कारण खराब हो चुका है। वर्तमान में ग्रामीण टैंकरों के माध्यम से अपनी प्यास बुझा रहे हैं। एक टैंकर के लिए 1000 रुपए चुकाने पड़ रहे हैं, जिससे ग्रामीणों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। यह व्यवस्था गरीब परिवारों की पहुंच से बाहर है। चंबल परियोजना के तहत वर्षों पहले गांव में भूमिगत पाइपलाइन बिछाई गई थी। हालांकि, आज भी अधिकांश गली-मोहल्लों में चंबल का पानी नहीं पहुंच रहा है। ग्रामीणों ने पेयजल समस्या के समाधान के लिए मंत्री स्तर तक गुहार लगाई है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ है। संबंधित विभाग के खिलाफ ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। ग्रामीण लक्ष्मीनारायण, वार्ड पंच राजवीर सिंह, पूर्व सरपंच जवाहर सिंह, योगेंद्र सिंह, सुघड़ सिंह, दीपक कुमार, शिवराम, छिद्दी सिंह, रत्तीराम मीणा, महेंद्र सिंह, लाखन सिंह सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने समस्या का समाधान न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।