बांसवाड़ा के गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय का 11वां स्थापना दिवस समारोह बुधवार को मनाया गया। विश्वविद्यालय परिसर स्थित राणा पूंजा सभागार में आयोजित किया गया। ​कार्यक्रम में विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षा, अनुसंधान, जनजातीय अध्ययन, कौशल विकास, नवाचार तथा सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद डॉ. सतीश पूनिया रहे। उन्होंने कहा- देश, राष्ट्रवाद और शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का उदाहरण देते हुए एक प्रेरक संस्मरण साझा किया। कलाम के संस्मरण से राष्ट्रवाद का संदेश दिया ​सांसद डॉ. सतीश पूनिया ने कहा- एक बात तो सत्य है और यह मैं नहीं, पूरी दुनिया कहती है। मुझे एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन का एक प्रसंग हमेशा बहुत अच्छा लगता है, जिसे मैं हर जगह दोहराता हूं। कलाम साहब एक सामान्य मछुआरे के घर पैदा हुए, बड़े वैज्ञानिक बने और फिर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के राष्ट्रपति बने, यह कोई सामान्य बात नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि आप राष्ट्रपति पद के नामांकन का फॉर्म भरने जा रहे हैं, तो कौनसा मुहूर्त ठीक रहेगा? तब उन्होंने बेहद अद्भुत बात कही थी कि भारत की धरती पर पैदा होना ही सबसे शुभ मुहूर्त हैं, इसलिए मुझे किसी अन्य मुहूर्त की आवश्यकता नहीं है। शोध और नवाचार पर व्याख्यान ​विश्वविद्यालय के कुलसचिव एवं वित्त नियंत्रक उदय सिंह ने बताया- स्थापना दिवस के मुख्य वक्ता मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के पूर्व कुलगुरु प्रो. बी.एल. चौधरी रहे। प्रो. चौधरी ने “उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, शोध एवं नवाचार” विषय पर अपना स्थापना दिवस व्याख्यान दिया और विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. केशव सिंह ठाकुर ने की। मंच संचालन प्रो. राजेश जोशी ने किया। उन्होंने बताया- इस दौरान जनजातीय क्षेत्र में उच्च शिक्षा के विकास, शोध और नवाचार से जुड़े विविध आयामों पर चर्चा की गई। विद्यार्थी रहे मौजूद ​इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के तमाम उच्च अधिकारी, विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता (डीन), विभागाध्यक्ष, संबंद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षक, शोधार्थी (रिसर्च स्कॉलर्स), पूर्व विद्यार्थी तथा क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए।