आमजन को आबादी भूमि या कन्वर्टेड प्लॉट संबंधित जानकारी के लिए अक्सर अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसमें समय की बर्बादी के साथ ही आर्थिक बोझ भी झेलना पड़ता हैं। अब जल्द सिंगल विंडो लैंड स्टैक से इस प्रकार की सभी समस्याओं से निजात मिल जाएगी। केंद्र सरकार के भूमि संसाधन विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने भूमि और संपत्ति संबंधी जानकारी के लिए एकल खिड़की प्रदान करने के लिए लैंड स्टैक का शुभारंभ किया है। लैंड स्टैक एक नया एकीकृत, जीआईएस आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म है। भूमि अभिलेख डिजिटाइज और एकीकृत होंगे। इसमें सभी आवासीय या अकृषि भूखंड के लिए 14 अल्फान्यूमैरिक कोड की विशिष्ट भूमि पार्सल पहचान संख्या या भू-आधार बनेगा। प्रोजेक्ट में भूमि, स्वामित्व, पंजीकरण, भवन डेटा, उपयोगिताओं आदि से संबंधित जानकारी मिलेगी। लैंड स्टैक राजस्व, सर्वेक्षण, पंजीकरण, स्थानीय निकाय विभागों के काम के लिए अंतरसंचालनीय प्लेटफॉर्म है। प्लॉट संबंधित विवाद और धोखाधड़ी पर लगेगी लगाम डाटा आधारित सिस्टम से अंतर विभागीय समन्वय में सुधार, भूमि विवाद कम होंगे। पारदर्शिता बढ़ने से धोखाधड़ी भी कम होगी। घर बैठे डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित, कानूनी रूप से मान्य भूमि अभिलेख डाउनलोड कर सकेंगे। बैंक भी ऑनलाइन सत्यापन कर सकेंगे, इससे ऋण लेनदेन में काफी तेजी आएगी। डिजिटल डाटा के कारण मानचित्रण में लगने वाला समय बचेगा। दुर्गम क्षेत्र में भी हवाई सर्वे के कारण नक्शे में स्पष्टता रहेगी। भूमि अधिग्रहण, उचित मुआवजे में आसानी रहेगी यूनिक राजस्व शब्दावली से भाषाई विविधता की समस्या खत्म होगी। दोहरी पहचान, बेनामी लेनदेन रुकेगा। व्यापार करने में आसानी होगी। ऑनलाइन फाइलिंग, रियल टाइम ट्रैकिंग से राजस्व न्यायालय मामला प्रबंधन प्रणाली सरल होगी। भूमि अधिग्रहण, उचित मुआवजे और पुनर्वास मानक लागू करने में आसानी रहेगी। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद प्रदेश में होगा लागू पायलट प्रोजेक्ट के लिए प्रदेश में जयपुर शहर समेत टोंक जिले की उनियारा तहसील का गुमानपुरा गांव शामिल है। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद चरणबद्ध तरीके से पूरे राज्य में लागू होगा। पायलट प्रोजेक्ट के कार्यान्वयन, निगरानी और अंतर विभागीय समन्वय के लिए और भूमि संसाधन विभाग और लैंड स्टैक समिति के साथ समन्वय के लिए राज्य स्तर पर एक नोडल अधिकारी नामित किया जा चुका है। केंद्र में अमित कुमार सिंह, निदेशक (एलआर), लैंड स्टैक परियोजना के लिए श्रम विभाग में नोडल अधिकारी हैं। केंद्र सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट शुरुआत में तमिलनाडु और चंडीगढ़ में शुरू किया। इनमें सफल होने के बाद सभी प्रदेशों में शुरुआत करने के लिए 27 जनवरी 2026 को ऑनलाइन डेमोंसट्रेशन दिया। जैसे फार्मर रजिस्ट्री बनने से कृषि भूमि को लेकर जितनी भी समस्याएं थी, वह सभी कम होने के साथ ही सारी चीजें ऑनलाइन होकर धीरे-धीरे योजनाओं का लाभ भी फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से ही मिलने लगा है। ठीक इसी प्रकार लैंड स्टैक की सुविधा शुरू होने के बाद कन्वर्टशुदा जमीन के मामले भी इसी के माध्यम से सुलटाए जाएंगे। साथ ही सरकार की योजनाओं का लाभ भी भू आधार के माध्यम से दिए जाएंगे।