तबादलों से प्रतिबंध हटाते समय सरकार ने एकल महिला, विधवा, परित्यक्ता, दिव्यांग, असाध्य रोग (कैंसर, हृदय, फेफड़े, किडनी सहित अन्य) से पीड़ित कर्मचारियों तथा राजकीय सेवा में कार्यरत पति-पत्नी के मामलों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए थे। आरोप है कि शिक्षा विभाग समेत अन्य विभागों ने इनकी पालना नहीं की। उल्टे बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारियों के दूरदराज तबादले कर दिए गए। प्रभावित कर्मचारी अब कोर्ट और राजस्थान सिविल सेवा अधिकरण पहुंच रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि विभागों ने इन श्रेणियों के लिए न अलग व्यवस्था बनाई और न ही आवेदन मांगे। सबसे अधिक शिकायतें शिक्षा विभाग से सामने आई हैं। विभाग ने 10 जुलाई तक डिजिटल हस्ताक्षर से ऑनलाइन तबादला आदेश जारी किए, लेकिन ऑफलाइन आदेशों से भी बड़ी संख्या में तबादले कर दिए। प्रशासनिक सुधार विभाग ने जब स्पष्ट रूप से लिख दिया था कि किस प्रकार के शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसकी पालना नही किए जाने से बड़ी संख्या में कार्मिकों कोर्ट व अधिकरण में पहुंच रहे हैं। -संदीप कलवानिया, एडवोकेट, राजस्थान हाईकोर्ट आदेश कुछ और, तबादले कुछ और मंत्री जोराराम का बेटा दीपक सुमेरपुर में ही रहेगा कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत के बेटे सहायक प्रोग्रामर दीपक का 9 जुलाई को सुमेरपुर (पाली) से 60 किमी दूर सांचौर जालौर तबादला हुआ, लेकिन 4 घंटे बाद ही आदेश निरस्त कर दिया। उन्हें फिर से सुमेरपुर में ही पदस्थापित कर दिया । सोशल मीडिया पर इसकी काफी चर्चा है। संघ कार्यकर्ता भी नहीं बचा; 59 की उम्र में 500 किमी दूर धौलपुर के प्रधानाध्यापक ने शिक्षा मंत्री के नाम वायरल पोस्ट में लिखा कि वह आरएसएस के द्वितीय वर्ष शिक्षित कार्यकर्ता हैं और भाजपा के लिए वर्षों काम किया। प्रमोशन के बाद 59 वर्ष की उम्र में उन्हें 500 किमी दूर झालावाड़ भेज दिया गया। वीआरएस लेने की बात भी कही। मुख्यमंत्री को शिक्षा विभाग में हुए तबादलों की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। बदले की भावना से और नियम विरूद्ध किए गए तबादले तुरंत निरस्त किए जाएं। जरूरत पड़ी तो शिक्षक दिल्ली कूच करेंगे। -नवीन कुमार शर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष, राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम