सरकारी स्कूलों में जर्जर छतों के नीचे बैठकर जोखिम उठा रहे लाखों बच्चों की सुरक्षा को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब स्कूलों की मजबूती का प्रमाण पत्र शिक्षक नहीं, बल्कि सार्वजनिक निर्माण विभाग के प्रोफेशनल इंजीनियर देंगे। बीकानेर निदेशालय ने इस संबंध में आदेश जारी कर राज्य के सभी सरकारी भवनों का जुलाई 2026 से पहले सेफ्टी ऑडिट करवाने के निर्देश दिए हैं। अब तक स्कूलों की सुरक्षा का जिम्मा शिक्षा विभाग के ब्लॉक अधिकारियों और शिक्षकों पर ही था। नतीजा यह हुआ कि बजट के अभाव में अफसरों ने दबाव में आकर जर्जर भवनों को भी कागजों में सुरक्षित बता दिया। उदयपुर जिले में ही 425 से ज्यादा भवन जर्जर होने के बावजूद अधिकारियों ने जमीनी हकीकत देखे बिना सुरक्षा प्रमाण-पत्रों पर हस्ताक्षर कर दिए थे। कोटड़ा जैसे ब्लॉक में 186 भवन डरा रहे थे, लेकिन कागजों में सब मजबूत था। दैनिक भास्कर ने इसे लेकर मामला उठाते हुए हाल में समाचार प्रकाशित किया था। इसे लेकर अब सरकार ने यू टर्न लेते हुए ये कार्य उस काम के माहिर इंजीनियरों के हवाले कर दिया है। पीडब्ल्यूडी को इन पैमानों पर देनी होगी सुरक्षा गारंटी सवाल - मानसून से पहले हो जाएगा ऑडिट? शिक्षा विभाग के जानकारों का मानना है कि शिक्षकों पर स्कूल भवनों की सुरक्षा ऑडिट का बोझ डालना गलत था, क्योंकि उनके पास तकनीकी समझ नहीं होती। अब पीडब्ल्यूडी के आने से कागजों पर चल रहा सफेद झूठ बंद होगा और जर्जर स्कूलों की मरम्मत के लिए 432 करोड़ का अटका हुआ बजट भी तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर जल्द जारी हो सकेगा। अब सवाल यह है कि क्या पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर मानसून से पहले सभी स्कूलों का ऑडिट पूरा कर पाएंगे या नहीं?